written by khatabook | September 3, 2021

टैली ईआरपी 9 में बैंक रिकॉन्सिलिएशन क्या है?

जैसा कि नाम से पता चलता है, बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट (BRS) एक स्टेटमेंट है, जो बैंक स्टेटमेंट और लेखा खातों के बीच बैलेंस को रिकॉन्साइल करता है। कई बार बैंक स्टेटमेंट के अनुसार बैलेंस और कैश बुक के अनुसार बैलेंस मेल नहीं खाते, इसीलिए बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट (BRS) की भूमिका सामने आई।

टैली में बैंक रिकॉन्सिलिएशन का महत्व क्या है?

यदि कैश बुक और पासबुक के बीच अंतर उचित नहीं है, तो टैली में बीआरएस उच्च प्रबंधन को बैंक से जानकारी लेने मे मदद करता है। बैंक ने उन एंट्री को किया होगा, जो कंपनी के हैं ही नहीं। बीआरएस के साथ लेन-देन को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है और ऑडिटर को यह पता लगाने में मदद करता है कि बिना रिकॉन्साइल की हुई राशि कितनी पुरानी है, ताकि वे व्यवसाय के बारे में पूरी समझ रख सकें। यहाँ तक ​​​​कि अगर ऐसी स्थिति होती है जब कैशियर बैंक बैलेंस को बढ़ाने की कोशिश करता है, तो ऑडिटर को बीआरएस देखकर सही तस्वीर मिल जाती है।

बीआरएस को रिकॉन्साइल करने के कई तरीके हैं। बाजार में विभिन्न सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जो बैंक रिकॉन्साइल करने की सुविधाएँ प्रदान करते हैं। परिणामस्वरूप हम बीआरएस बनाने की मैनुअल प्रक्रिया से इलेक्ट्रॉनिक पद्धति में बदलाव देख रहे हैं। हालांकि बीआरएस बनाने का सिद्धांत हमेशा वही रहता है। लेन-देन की बढ़ी मात्रा को देखते हुए बीआरएस बनाने की मैनुअल प्रक्रिया में कुछ दिन लगेंगे। बीआरएस तैयार करने के लिए टैली ईआरपी 9 में बीआरएस जैसे सॉफ्टवेयर टूल्स का उपयोग करना हमेशा ठीक होता है।

बैंक रिकॉन्सिलिएशन में क्या अंतर उत्पन्न हो सकता हैं?

1. चेक(Cheque): हो सकता है कि कंपनी ने चेक जारी किया हो, लेकिन वेंडर ने इसे भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किया हो। इसी तरह बैंक में जमा किया गया चेक शायद क्लियर नहीं हुआ हो। एक बैंक को चेक क्लियर करने में अधिकतम 3 दिन का समय लगता है। लेन-देन की पुस्तकों में एंट्री बंद नहीं हो सकतीं क्योंकि अकाउंटेंट एंट्री पास करना जारी रखता है। रिकॉन्साइल नहीं किए गए राशि पर नियंत्रण रखने के लिए कैशियर बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट तैयार करता है। 

एक बार चेक क्लियर हो जाने के बाद राशि बीआरएस से लेन-देन की खाते में चली जाती है। व्यावसायिक जगहों में पोस्ट-डेटेड चेक जारी करना एक आम बात है। पोस्ट-डेटेड चेक के बारे में एंट्री लेखा खातों में पास हो जाती हैं। चूंकि यह पोस्ट-डेटेड चेक है इसलिए यह बैंक स्टेटमेंट में तब तक नहीं दिखेगा जब तक इसकी तारीख नहीं आ जाती। इसलिए ये चेक बीआरएस में बिना रिकॉन्सिलिएशन के रहती है।

2. ब्याज की एंट्री: बैंक सावधि जमा (Fixed deposits) पर ब्याज आय देता है। यह इनकम कभी-कभी खातों में दर्ज इनकम से मेल नहीं खाती। हो सकता है लोन की राशि पर भी ब्याज में मेल नहीं हो पाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्याज की कैलकुलेशन के लिए बैंक का एक अलग तरीका है। यह प्रथा हर बैंक में अलग-अलग होती है और ब्याज मासिक या दैनिक रूप से दर्ज किया जाता है।

3. बैंक चार्ज: बैंक अपने द्वारा दिए जाने वाली सेवा के लिए चार्ज डेबिट करता है। हो सकता है कि कंपनी का प्रबंधन इन चार्ज से सहमत न हो, इसलिए यह तब तक बीआरएस में दिखाई दे सकता है जब तक कि यह मामला सुलझ नहीं जाता।

4. निर्देशित अधिदेश का भूल जाना : कंपनी ने बैंक को कुछ स्थायी निर्देश दिए होंगे। इनमें आवश्यकता के अनुसार चुने हुए कुछ खाते में फंड ट्रांसफर करने के निर्देश शामिल हो सकते हैं, लेकिन अकाउंटेंट खाते में एंट्री पास करते समय उन अधिदेश को भूल सकता है।

5. स्टेल चेक: कंपनी ने अपने वेंडर को चेक जारी किया होगा, लेकिन अगर वेंडर चेक की तारीख के 3 महीने के भीतर चेक को भुनाने में विफल रहता है तो यह आरबीआई के आदेश के अनुसार स्टेल हो जाता है। नतीजतन एक नया चेक जारी करना होगा। नहीं तो अकाउंटेंट को पेमेंट एंट्री को रीवर्स करना होगा और संबंधित लाईबिलिटी को रिकॉर्ड करने की जरूरत होगी। यह एंट्री उपयुक्त लेज़र के सामने पास हो जाती है। जब तक रिवर्स प्रोसेस नहीं किया जाता, तब तक पिछला बैलेंस बीआरएस में दिखता रहेगा।

बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट की संरचना क्या है?

  • बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट तैयार करने के तरीके पर ध्यान देने वाली पहली बात यह है कि खातों के अनुसार या बैंक स्टेटमेंट के अनुसार कैश की बैलन्स राशि का मूल्यांकन किया जाता है।
  • उसके बाद प्रत्येक लेन-देन का मैच करना आवश्यक है जैसा कि खातों या बैंक स्टेटमेंट में दिखाया गया है। यदि आप खातों के अनुसार बैलेंसिंग प्रोसेस शुरू करते हैं तो बैंक स्टेटमेंट के अनुसार वास्तविक राशि तक पहुंच सकते है।
  • दूसरी ओर, यदि आप बैंक स्टेटमेंट के अनुसार बैलन्स राशि से शुरू करते हैं तो खातों के अनुसार राशि को बैलेंस करें।

कैशियर उसी के अनुसार राशियों का जोड़ या घटाव करता है। वह बैंक स्टेटमेंट और अकाउंट बुक दोनों में दिखाए गए हर ट्रांजैक्शन पर निशान लगाता है। रिकॉन्सिलिएशन प्रोसेस तब तक जारी रहती है, जब तक टारगेट बैलेंस मैच नहीं हो जाता।

हमें टैली की आवश्यकता क्यों है?

टैली एक एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सॉफ्टवेयर है, जो आमतौर पर बुक कीपिंग और अकाउंटिंग के लिए उपयोग किया जाता है। यह विंडोज (Windows) प्लेटफॉर्म के साथ काम करता है और इसका उपयोग पेरोल मेनेजमेंट, बैंकिंग, अकाउंटिंग, इन्वेंट्री मेनेजमेंट, जीएसटी रिकॉन्सिलिएशन और कंपनी की कई अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए किया जाता है। यह एक बहुउद्देश्यीय सॉफ्टवेयर है जिसे बुक कीपिंग की जरूरतों को आसानी से पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए इसे किसी व्यवसाय की सभी प्रबंधन लेखांकन आवश्यकताओं के लिए वन-स्टॉप सोल्यूशन के रूप में माना जा सकता है।

टैली ईआरपी 9 का उपयोग करके बीआरएस बनाने की मैन्युअल प्रक्रिया को आसानी से सुव्यवस्थित किया जा सकता है। टैली ईआरपी 9 में बीआरएस उपयोग में आसानी प्रदान करता है। खासकर जब लेन-देन की एक बड़ी मात्रा होती है। जब कई लेन-देन होते हैं तो प्रत्येक बैंक लेन-देन को मैच करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो जाता है। यह ऑटो और मैनुअल दोनों तरह की रिकॉन्सिलिएशन सुविधाएँ प्रदान करता है। टैली ईआरपी 9 बैंक रिकॉन्सिलिएशन की सहायता से बीआरएस बनाना आसान हो जाता है।

टैली में ऑटो रिकॉन्सिलिएशन फंक्शन का उपयोग कैसे करें?

टैली ईआरपी 9 में सबसे पहले ऑटो बैंक रिकॉन्सिलिएशन को सक्रिय करें

चरण 1: गेटवे ऑफ टैली (gateway of Tally) से शुरू करें। फिर अकाउंट इंफो (accounts info) चुनें।

इसके बाद लेज़र पर क्लिक करें। यदि बैंक लेजर पहले से ही बना हुआ है, तो ऑल्टर (alter) पर क्लिक करें, नहीं तो क्रीऐट (create) पर क्लिक करें।

 

चरण 2: ऑटो बीआरएस कॉन्फ़िगरेशन को सेट/ऑल्टर करने के लिए विकल्प में हाँ (Yes) चुनें। 

चरण 3: एंटर दबाएं और आवश्यकतानुसार परिवर्तनों को स्वीकार करें। इसके बाद सबसे नीचे एक्सेप्ट (Accept) बटन पर क्लिक करें।

टैली में बैंक रिकॉन्सिलिएशन तैयार करने के लिए ऑटो बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट का उपयोग कैसे करें?

चरण 1: गेटवे ऑफ टैली से शुरू करें। फिर यूटिलिटी हेड में उपलब्ध विकल्प में से बैंकिंग का चयन करें।

चरण 2: फिर उपलब्ध विकल्पों से बैंक रिकॉन्सिलिएशन पर क्लिक करें।

चरण 3: आपके स्क्रीन पर बैंकों की सूची दिखाई देगी। यदि स्क्रीन पर बैंक का नाम दिखाई नहीं देता है तो हो सकता है कि लेजर बनाने में कुछ समस्या हो। यह भी हो सकता है कि आपने संबंधित लेजर को बैंक खाता लेजर के रूप में निर्दिष्ट नहीं किया हो। टैली के गेटवे से अल्टर लेज़र विकल्प पर जाएँ। जरूरत के हिसाब से बदलाव करें।

चरण 4: अपनी दाईं ओर बैंक स्टेटमेंट बटन पर क्लिक करें। वैकल्पिक रूप से आप Alt B बटन भी दबा सकते हैं। दोनों का मतलब एक ही है।

चरण 5: डायरेक्ट्री पाथ को उलेलिखित करें। यह पाथ बैंक स्टेटमेंट का एड्रैस (address) है। टॉप पर फ़ाइल टाइप ऑप्शन से सपोर्टेड ऑप्शन का चयन करें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपके सामने केवल सपोर्टेड वर्ज़न ही दिखाई दें।

चरण 6: जब आप सही फ़ाइल का चयन कर लेते हैं, तो उस पर क्लिक करें। इसके बाद ऑटो रन होगा। एक बार रिकॉन्सिलिएशन हो जाने के बाद, सफल रिकॉन्सिलिएशन की एक नोटिफिकेशन दिखाई देगी। स्क्रीन के नीचे निम्नलिखित विवरण दिखाई देंगे।

कंपनी की खातों के अनुसार शेष राशि: नवीनतम लेखा तिथि के अनुसार, कंपनी की बही में शेष राशि दिखाई देगी।

बैंक में दिखाई नहीं देने वाली राशियाँ: वे राशियाँ जो आज तक बैंक स्टेटमेंट में रिफ्लेक्ट नहीं होती हैं। वे रिपोर्टिंग डेट के बाद बैंक स्टेटमेंट में हो सकते हैं।

कंपनी की खातों में रिफ्लेक्ट नहीं हुई राशि: खातों में मिसिंग एंट्री और जो रिपोर्टिंग डेट के भीतर है, यहां दिखाई देंगी।

बैंक के अनुसार शेष राशि: यदि कोई मिस्मैच नहीं है, तो यह खातों की शेष राशि से मैच करना चाहिए।

चरण 7: बैंक स्टेटमेंट के साथ बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट दिखाई देगा। आप बैंक स्टेटमेंट से उन एंट्री की सूची देखेंगे जिनका अभी तक कंपनी के खातों में हिसाब नहीं किया गया है।

चरण 8: बैंक स्टेटमेंट में लेन-देन की एंट्री पास करके रिकॉन्सिलिएशन प्रक्रिया शुरू करें। यदि वे एंट्री कंपनी से संबंधित नहीं हैं तो इसे बिना रिकॉन्सिलिएशन किए छोड़ दे।

कंपनी की खातों में दिखाई नहीं देने वाली राशि का चयन करें। इसके बाद रिकॉन्साइल अनलिंक्ड बटन पर क्लिक करें। यह कंपनी के खातों की सबसे उपयुक्त लेन-देन दिखाएगा। स्पेस बार के माध्यम से सबसे उपयुक्त लेन-देन का चयन करें और एंटर बटन दबाएं। बीआरएस रिकॉन्साइल हो जाएगा।

यदि कंपनी की खातों में कोई लेन-देन नहीं हुआ है, तो आपको अलग से वाउचर एंट्री पास करनी होंगी। ऐसा करने के लिए क्रिएट वाउचर बटन या Alt C पर क्लिक करें।

वैकल्पिक रूप से आप टैली के गेटवे के डिस्प्ले मेनू से उपयुक्त बैंक लेज़र का चयन कर सकते हैं।

  • उसके लिए डिस्प्ले पर क्लिक करें और अकाउंट बुक्स चुनें। फिर लेज़र ऑप्शन चुनें।
  • वह बैंक चुनें जिसे आप रिकॉन्साइल करना चाहते हैं।
  • इसके बाद अपनी बाईं ओर स्थित रिकॉन्साइल बटन पर क्लिक करें। परिणामस्वरूप, आपकी स्क्रीन पर बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट दिखाई देगा।
  • बैंक स्टेटमेंट से क्लियरिंग की तारीख दर्ज करें। इसे बैंक डेट कॉलम में भरें।

डिटेल्स बीआरएस में डालने के बाद कैसे बदलें?

चरण 1: गेटवे ऑफ टैली से डिस्प्ले विकल्प चुनें। फिर अकाउंट बुक्स चुनें। उसके बाद कैश/बैंक बुक पर क्लिक करें।

चरण 2: स्क्रीन पर दिखाई देने वाले लेजर की सूची से आवश्यक बैंक खाते का चयन करें। साथ ही उस आवश्यक अवधि का चयन करें, जिसके लिए रिकॉन्सिलिएशन में बदलाव किया जाएगा। F5 बटन दबाएं। यह रिकॉन्सिलिएशन स्क्रीन पर ले जाएगा।

चरण 3: कॉन्फ़िगरेशन विकल्प तक पहुँचने के लिए F12 बटन दबाएं। डाईलॉग के सामने "हाँ (Yes)" रिकॉन्साइल किए गए लेन-देन भी दिखाएं " चुनें - ।

चरण 4: बैंक के साथ रिकॉन्साइल किया हुआ लेन-देन खुल जाएगा। अब आप अपनी आवश्यकता के अनुसार रिकॉन्सिलिएशन पेज में बदलाव कर सकते हैं।

टैली ईआरपी 9 में बीआरएस का उपयोग करते समय ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु

1. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि एक्सेल फ़ाइल पहली पंक्ति पर कॉलम हेडिंग से शुरू होती है। अन्य सभी विवरण बिना किसी खाली स्थान के होने चाहिए।

2. निकासी और जमा दोनों के लिए राशि कॉलम में शून्य या खाली मानों के लिए '0' होना चाहिए।

3. यदि कोई बिना रिकॉन्साइल वाला शेष राशि है तो आपको उन्हें मैन्युअल रूप से मैच करना होगा।

टैली में बीआरएस की प्रिंटिंग 

उपयोगकर्ता बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट प्रिंट कर सकता है। यह आमतौर पर रिकॉर्ड रखने की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

  • टैली के गेटवे ऑफ टैली से शुरू करें।
  • इसके बाद बैंकिंग का चयन करें।
  • उसके बाद बैंक रिकॉन्सिलिएशन का विकल्प चुनें। स्क्रीन पर बैंकों की सूची दिखाई देगी। रिकॉन्सिलिएशन के लिए आवश्यक बैंक चुनें। उस बैंक का बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  • इसके बाद प्रिंट बटन पर क्लिक करें। वैकल्पिक रूप से आप Alt और P बटन भी साथ में दबा सकते हैं। फिर प्रिंटिंग स्क्रीन दिखाई देगी।

टैली में बीआरएस प्रिंट करते समय याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

सिलेक्ट वाउचर टू शो में, ऑल वाउचर चुनें। आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कस्टमाइज भी कर सकते हैं। कई अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं। यह हैं:

शो नैरेशन (नैरेशन भी दिखाएं): अगर आप प्रिंट रिजल्ट में नैरेशन दिखाना चाहते हैं तो इस विकल्प को चुनें।

शो रीमार्क्स ऑल्सो (टिप्पणियां भी दिखाएं): यदि आपने पहले कुछ टिप्पणियां दी हैं और उन्हें प्रिंट परिणाम में दिखाना चाहते हैं तो इस विकल्प का चयन करें।

शो फोरेक्स डिटेल्स टू (विदेशी मुद्रा विवरण भी दिखाएं): यदि आपके व्यवसाय में कोई विदेशी मुद्रा लेन-देन है तो आप उन्हें प्रिंट स्टेटमेंट में दिखा सकते हैं।

रिकॉन्साइल किए गए लेन-देन भी दिखाएँ: यदि आप रिकॉन्साइल किए गए वाउचर की सूची चाहते हैं तो इस विकल्प का चयन करें।

शो पेमेंट रिसीव्ड फ्रॉम (से प्राप्त भुगतान दिखाएं): यह प्राप्तकर्ता और भुगतान के स्रोत का विवरण देता है। हाँ पर क्लिक करें यदि आप इसको देखना चाहते हैं।

निचले दाएं कोने में एक छोटा सा बॉक्स दिखाई देगा। आगे बढ़ने के लिए हाँ क्लिक करें।

निष्कर्ष

आप बीआरएस के माध्यम से खातों और बैंक स्टेटमेंट के बीच किसी भी मिस्मैच को उस वक्त भी ट्रैक कर सकते हैं जब बैंक बैलेंस में दैनिक उतार-चढ़ाव होता है। यदि आवश्यक हो तो अकाउंटेंट दैनिक बीआरएस बना सकता है जिसके माध्यम से कैश में चोरी और कमी को ट्रैक किया जा सकता है। यह बुक बैलेंस और बैंक स्टेटमेंट के बीच के अंतर को बताता है।

टैली ईआरपी 9 में बैंक रिकॉन्सिलिएशन उपयोगकर्ताओं को कई विकल्प देता है। इनमें ऑटो रिकॉन्सिलिएशन, रीचेक, और पिछले लेन-देन का सुधार और बहुत कुछ शामिल हैं। अपने व्यवसाय को अधिक कुशल बनाने के लिए अभी Biz Analyst ऐप डाउनलोड करें। यह टैली उपयोगकर्ताओं को अपने व्यवसाय से जुड़े रहने में मदद करता है और उनकी बिक्री का विश्लेषण करता है जिससे व्यवसाय में वृद्धि होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. टैली ईआरपी 9 में बीआरएस में दिखायी गई प्रभावी तिथि क्या है?

प्रभावी तिथि की गणना खातों के खुलने की तिथि से की जाती है। इस तिथि से ही रिकॉन्सिलिएशन हो सकती है।

2. क्या मैं ऑटो रिकॉन्सिलिएशन का विकल्प चुनने के बाद भी मैन्युअल रिकॉन्सिलिएशन पर स्विच कर सकता हूँ?

हाँ, आप फिर से मैन्युअल मोड में वापस जा सकते हैं। उसके लिए आपको कॉन्फ़िगरेशन विंडो से ऑटो रिकॉन्सिलिएशन को डिजेबल (disable) करना होगा।

3. क्या कैश बेसिस के अकाउंटिंग में बीआरएस तैयार करने की मेथड में बदलाव होता है?

कैश या एक्रुअल बेसिस कुछ भी हो, लेकिन बीआरएस बनाने की विधि हमेशा समान रहती है।

4. क्या बहीखातों और बैंक टैली के अनुसार शेष राशि एक होने पर बीआरएस तैयार करना आवश्यक है?

यदि बहीखातों और बैंक खाता दोनों की शेष राशि में मेल खाता है, तो बीआरएस तैयार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

5. एक टैली सॉफ्टवेयर का नाम बताइए, जो बीआरएस को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।

Biz Analyst ऐप एक ऐसा एप्लिकेशन है जो व्यापार मालिकों को बीआरएस सहित अपने व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं का प्रबंधन करने में मदद करता है। आप इस ऐप का उपयोग करके अपनी बिक्री उत्पादकता का विश्लेषण करके बिक्री उत्पादकता में वृद्धि कर सकते हैं और खराब नकदी प्रवाह यानि कैश फ़्लो से बच सकते हैं।

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