written by khatabook | September 2, 2021

लाभ और हानि खाता और स्टेटमेंट

प्रॉफ़िट और लॉस अकाउंट, जिसे प्रॉफ़िट और लॉस स्टेटमेंट के रूप में भी जाना जाता है, किसी भी व्यवसाय के लिए किसी भी इकाई के फाइनेंशियल स्टेटमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लाभ-उद्देश्य हो या न हो इसके बावजूद एक गैर-लाभकारी संगठन अपने परफॉरमेंस का मूल्यांकन करने के लिए एक आय और व्यय (Income and Expenditure) खाता भी तैयार करता है। यह एक निश्चित अवधि के लिए एक स्टेटटमेंट है। यह इकाई के राजस्व और उस राजस्व को अर्जित करने के लिए खर्च की गई लागत को दर्शाता है, अंततः यह बताता है कि व्यवसाय लाभ में है या हानि में।

लाभ और हानि खाते के प्रकार क्या हैं

अकाउंटिंग की भाषा में, प्रॉफ़िट और लॉस अकाउंट एक नॉमीनल अकाउंट है। प्रत्येक आकॉउन्ट को Debit’ and ‘Credit  में दोहरे प्रभाव का उपयोग करके तैयार किया जाता है। इसका मतलब है कि खातों में से एक को डेबिट किया जाता है और दूसरे को golden rules of accounting  को ध्यान में रखते हुए क्रेडिट किया जाता है। आइए अब आगे बढ़ने से पहले अकाउंटिंग की मूल बातें समझते हैं।

खातों के प्रतिनिधित्व (representation) के आधार पर खाते तीन प्रकार के होते हैं। प्रत्येक प्रकार के खाते में अकाउंटिंग नियमों का अपना सेट होता है जो निम्नानुसार वर्णित है:

क्रंसं.

खाते का प्रकार

फंक्शन 

अकाउंटिंग का गोल्डन रूल 

1

पर्सनल अकाउंट 

यह खाता लोगों के लिए है।

वे देनदार, लेनदार या कोई अन्य व्यक्ति हो सकते हैं जिनके लिए पैसा देय या प्राप्य है।

उदाहरण के लिए,  Ram A/c

डेबिट: पाने वाला का नाम

क्रेडिट : देने वाला का नाम 

2

रियल अकाउंट 

यह खाता वस्तुओं के लिए है।

उदाहरण के लिए, Cash A/c, Bank A/c, Furniture A/c.

डेबिट: जो बिजनेस में आता है

क्रेडिट : जो बिजनेस से जाता है

3

नॉमिनल अकाउंट 

ये खाते राजस्व या व्यय का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उदाहरण के लिए, ales A/c, Loss on sale A/c, Bad Debt A/c.

डेबिट: खर्च और नुकसान।

क्रेडिट: आय और लाभ।

उपरोक्त नियमों के अनुसार लाभ और हानि का स्टेटमेंट खर्चों और हानियों को डेबिट करने और आय और लाभ को क्रेडिट करने के आधार पर तैयार किया जाता है।

लेखांकन की प्रणाली

अकाउंटिंग लेखांकन की दो प्रणालियों के इर्द-गिर्द घूमता है। एक कैश सिस्टम है और दूसरा एक्रूअल सिस्टम।

  • अकाउंटिंग की कैश सिस्टम:

इस प्रणाली के तहत कैश फ़्लो होने पर लेन-देन दर्ज किए जाते हैं। इसका मतलब है कि एक खर्च केवल तभी बुक किया जाता है, जब नकद भुगतान किया जाता है और एक आय केवल तभी बुक की जाती है जब नकद प्राप्त हो। कैश फ़्लो लेन-देन को रिकॉर्ड करने के लिए मायने रखता है और उसी के अनुसार एक निश्चित अवधि के लिए लाभ और हानि की गणना की जाती है। यह फाइनेंशियल में गलत जानकारी दिखाने वाले आंकड़ों को टाल सकता है।

  • अकाउंटिंग की एक्रूअल सिस्टम

अधिकांश संस्थाओं विशेष रूप से सार्वजनिक और निजी कंपनियों, टैक्स ऑडिट करने वाली संस्थाओं, GAAP और IFRS का अनुपालन करने वाली संस्थाओं को अकाउंटिंग की एक्रूअल सिस्टम का पालन करना आवश्यक है। इस प्रणाली के तहत कैश फ़्लो के समय की परवाह किए बिना  जब वे घटित होते हैं उसी समय लेन-देन को दर्ज किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई चालान जारी किया जाता है तो लेन-देन रिकॉर्ड किया जाता है भले ही बिक्री क्रेडिट के आधार पर की गई हो। यह आय और व्यय को उसी अवधि में रिकार्ड करता है और लेन-देन में विलंब होने से बचाता है। अकाउंटिंग की एक्रूअल सिस्टम वर्तमान परिदृश्यों में सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।

लाभ और हानि खाते के घटक  

P & L खाता दो घटकों पर आधारित हैं:

  • ट्रेडिंग अकाउंट 
  • प्रॉफ़िट और लॉस अकाउंट स्टेटमेंट

क्रं सं

आइटम 

व्याख्या 

A

ट्रेडिंग अकाउंट

 

1.

डेबिट 

 

क.

Opening Stock

यह दी गई अवधि की शुरुआत में इकाई के पास पड़े स्टॉक की शुरुआती बैलेंस है। यह आंकड़ा पहले की अवधि के बैलेंस शीट से लिया जा सकता है, जहाँ इसे क्लोजिंग स्टॉक के रूप में दिखाया गया है। इसमें कच्चे माल, कंस्यूमेबल स्टॉक, वर्क इन प्रोग्रेस स्टॉक और तैयार माल (Finished Goods) के स्टॉक शामिल हो सकते हैं।

ख.

Purchases

इसमें बिक्री के उद्देश्यों के लिए दी गई अवधि के दौरान इकाई द्वारा की गई खरीदारी शामिल है। ये अवधि के दौरान या शीघ्र ही बिक्री के लिए इच्छित वस्तुओं की खरीद हैं लेकिन इसमे निवेश उद्देश्यों के लिए खरीदी गई संपत्ति नहीं होती हैं।

ग. 

Purchase Return

परचेज रिटर्न खरीदे गए वो सामान हैं, जो किसी भी नुकसान या दोष या अस्वीकृत माल के कारण वापस कर दिए गए हैं। इन्हें ट्रेडिंग खाते में खरीद से घटाकर दिखाया जाता है।

घ. 

Freight or Transport  Expenses

इनवेंटरी (Inventory) के लिए खर्च की गई माल ढुलाई या परिवहन व्यय लाभ और हानि खाते में डेबिट के रूप में दिखाए जाते हैं।

2.

क्रेडिट 

 

क.

Sales

बिक्री में व्यवसाय के सामान्य कोर्स में वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री के माध्यम से अर्जित राजस्व शामिल होता है। संपत्ति या स्क्रैप की कोई भी बिक्री जो एक नियमित व्यापारिक गतिविधि नहीं है उसे  यहां पर नहीं लिया जाता है।

ख 

Sales Return

ये वे सामान हैं, जिन्हें हमारे ग्राहकों द्वारा बिक्री के बाद अस्वीकार कर दिया जाता है। उन्हें बिक्री से घटाकर दिखाया गया है।

ग 

Closing Stock

यह अवधि के अंत में पड़े माल के क्लोज़िंग वैल्यू को दर्शाने वाला आंकड़ा है। इसकी गणना ओपनिंग स्टॉक परचेज - कॉस्ट ऑफ गुड्ज़ सोल्ड के रूप में की जाती है।

     

B

Profit and Loss Account

 

1.

Debit Side

 
  1. a.

Salaries and Wages

ये श्रमिकों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भुगतान किए गए रोजगार खर्च हैं।

  1. b.

Marketing Expenses

विज्ञापन और बिक्री के प्रमोशन से संबंधित खर्चों पर विचार किया जाता है।

  1. c.

Depreciation Expenses

ये गैर-नकद खर्च हैं, जो इसकी राजस्व क्षमता के कारण संपत्ति की टूट-फूट की मात्रा को दर्शाते हैं। ये संपत्ति के मूल्य को कम करते हैं।

  1. d.

Outstanding expenses

कोई भी बकाया खर्च जो खर्च किया गया है लेकिन अभी तक भुगतान नहीं किया गया है उसे उसी अवधि के खर्च के रूप में दिखाया जाता है।

  1. e.

Rents and Royalties

व्यवसाय के लिए उपयोग की जाने वाली संपत्तियों और उपकरणों के लिए भुगतान किए गए किराए और पेटेंट और ट्रेडमार्क के लिए भुगतान की गई रॉयल्टी को भी कंपनी के लिए एक लागत माना जाता है।

  1. f.

Bad Debts

पहले मिलने वाली (receivable) राशि के रूप में जो राशि दिखाई गई थी और बाद में वसूली नहीं की जा सकने वाली किसी भी राशि को लाभ और हानि खाते को डेबिट करके राइट ऑफ कर दिया जाता है।

  1. h.

Other Operating Expenses

उपरोक्त खर्चों के साथ-साथ मरम्मत और रखरखाव, संपत्ति कर, लोन और डेट फंड पर ब्याज, यात्रा व्यय, कानूनी शुल्क, बैंक शुल्क जैसे अन्य खर्च।

  1. g.

Non-Operating expenses

ये व्यवसाय के लिए किए गए वन टाइम खर्च हैं।

उदाहरण के लिए, प्रारंभिक व्यय (Preliminary Exp.), संपत्ति की बिक्री पर नुकसान, आग या चोरी से होने वाली हानि, विदेशी मुद्रा की एक्सचेंज पर हानि, आदि।

2.

Credit Side

 
  1. a.

Operating Income

मुख्य व्यावसायिक गतिविधियों से अर्जित आय को ऑपरेटिंग इनकम कहा जाता है।

  1. b.

Non-Operating Income

लाभांश, ब्याज, संपत्ति की बिक्री से लाभ, विदेशी मुद्रा के एक्सचेंज पर लाभ जैसे निवेश से वन टाइम इनकम।

लाभ और हानि खाता कैसे तैयार किया जाता है?

बुक कीपिंग की पारंपरिक प्रणाली में फाइनेंशियल स्टेटमेंट तैयार करने के कुछ चरण शामिल थे:

1. जर्नल (Journal): डेबिट और क्रेडिट खातों और इसमें शामिल राशि और लेन-देन का वर्णन करने के लिए एक संक्षिप्त विवरण दिखाते हुए लेन-देन का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक जर्नल एंट्री दर्ज की गई थी। प्रत्येक एंट्री को संदर्भ के लिए मैन्युअल रूप से क्रमांकित किया गया था जिसे फोलियो नंबर कहा जाता था जिसका उपयोग लेन-देन को ट्रैक करने के लिए किया जाता था।

2. लेजर (Ledger): एक लेज़र T-आकार का खाता होता है, जिसमें बाएं आधे हिस्से में डेबिट पक्ष और दाएं आधे हिस्से में क्रेडिट पक्ष होता है। जर्नल में एंट्री लेजर अकाउंट में पोस्ट की जाती हैं। प्रत्येक अलग खाते का एक अलग लेजर होता है। दी गई अवधि के अंत में लेजर बंद कर दिया जाता है। रियल और पर्सनल अकाउंट की बैलेंस,  बैलेंस शीट में रिफ्लेक्ट होती है और नॉमिनल अकाउंट लाभ और हानि खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

3. ट्रायल बैलेंस (Trial Balance): ट्रायल बैलेंस एक स्टेटमेंट है जो सभी डेबिट और क्रेडिट बैलेंस को एक सूची के रूप में दिखाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक एंट्री को सही तरीके से दर्ज किया गया है। यहां डेबिट का योग क्रेडिट से मेल खाना चाहिए।

4. बैलेंस शीट (Balance Sheets): सभी व्यक्तिगत और वास्तविक खाते बंद नहीं होते हैं और उनकी शेष राशि बैलेंस शीट में दिखाई जाती है। लाभ और हानि खाते के विपरीत एक दी गई तारीख के अनुसार एक बैलेंस शीट तैयार की जाती है। साथ ही लाभ और हानि खाते की शेष राशि को बैलेंस शीट में ट्रांसफर कर दिया जाता है। एक बैलेंस शीट में दाईं ओर ऐसेट (Asset) और बाईं ओर लाईबिलिटी (Liability) होती हैं।

सभी नॉमिनल अकाउंट बंद कर दिए जाते हैं और लाभ और हानि खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। उनमें अगली अवधि के लिए आगे ले जाने के लिए कोई भी बैलेंस शामिल नहीं होता है। इनका निपटान P & L खाते में बैलेंस राशि को ट्रांसफर करके किया जाता है। नेट बैलेंस लाभ या हानि को दर्शाता है। बुक-कीपिंग और अकाउंटिंग की ईआरपी प्रणालियों में केवल जर्नल एंट्री को दर्ज करने की आवश्यकता होती है। बाकी एंट्री सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से की जाती हैं। सभी रिपोर्ट सिस्टम द्वारा सबसे कुशल तरीके से तैयार की जाती हैं।

P&L खाते की संरचना के संबंध में, क्रेडिट आय (Income) का प्रतिनिधित्व करते हैं और डेबिट व्यय (Expense) का प्रतिनिधित्व करते हैं। जहां क्रेडिट बैलेंस होता है वह लाभ दिखाता है। यानी खर्च से ज्यादा आय। जहां डेबिट बैलेंस होता है वहां नुकसान होता है। यानी आय से अधिक व्यय।

प्रारूप और संरचना जानने के लिए नीचे दो लाभ और हानि विवरण के सैम्पल को देखें।

A]

ABC Company

Prop.: XYZ

PAN: CLFOT5412B

Address: 12/8D, Secunderabad, Telangana, 500060

           

Profit and Loss Account for the year ended 31/03/2020

AY 2020-21

Particulars

 

Amount (in Rs)

Particulars

 

Amount (in Rs)

           

To Opening Stock

 

              50,000        

By Sales

 

          50,200

To Purchases

 

            134,540 

By Service Charges

 

        424,010 

To Direct Costs

 

                4,800 

By Closing Stock

 

          52,973 

To Transport

 

                    550 

By Discount Received

 

                740 

           

To Gross Profit c/d

 

            338,033 

     
   

            527,923 

   

        527,923 

           

To Bank Charges

 

                    240 

By Gross Profit b/d

 

        338,033 

To Petrol Charges

 

                6,580 

By Dividend Income

 

            1,200

To Rent Paid

 

              66,000 

     

To Depreciation 

 

                9,835 

     

To Repairs & Maintenance

                4,000 

     

To Telephone Charges

 

                1,600 

     

To Electricity Charges

 

                3,600 

     

To Miscellaneous Charges

                3,900 

     
           

To Net Profit c/d

 

            243,478 

     
   

            388,033 

   

        388,033 

           

As per information on a given date,

       
     

ABC Company

 
           
           
     

XYZ

   

Date: 10/01/2021

   

(Proprietor)

   

Place: Secunderabad

         

B]

DEF Technologies Limited

Statement of Profit and Loss for the year ended 31st March 2020.

 

('000)

 
 

2019-2020

2018-2019

Sales and revenues:

   
     

Revenues from Operating Activities

9,624

8,520

Total sales and revenues

9,624

8,520

     

Operating costs:

   

Cost of goods sold

4,126

3,512

Selling and administrative expenses

612

452

Research and development expenses

926

984

Interest expense of Financial Products

250

120

Other operating (income) expenses

154

98

Total operating costs

6,068

5,166

Operating profit

3,556

3,354

Interest expense excluding Financial Products

342

465

Other income (expense)

287

169

Consolidated profit before taxes

4,185

3,988

Provision for income taxes

1,256

1,196

Profit attributable to common shareholders

2,930

2,792

Profit per common share

4.8825

4.6526667

प्रत्येक पंक्ति को विस्तार से समझाने या किसी भी प्रासंगिक स्पष्टीकरण को जोड़ने के लिए इन विवरणों को नोट्स टू अकाउंट्स के साथ प्रस्तुत किया गया है।

पीएल खाते के उद्देश्य

लाभ और हानि खाते का प्राथमिक उद्देश्य यह जांचना है कि व्यवसाय एक निश्चित अवधि के लिए लाभ या हानि अर्जित करता है या नहीं। यह किसी भी फाइनेंशियल स्टेटमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें दर्शाए गए आंकड़े विश्लेषण उद्देश्यों के लिए विभिन्न अनुपातों की गणना के लिए उपयोग किए जाते हैं। निवेशकों, अन्य हितधारकों, आदि को अपने निर्णय लेने पर विचार करने के लिए इस स्टेटमेंट की आवश्यकता होती है। इस खाते को आधार मानकर प्रबंधन के विश्लेषणात्मक अध्ययन के लिए कई रिपोर्ट तैयार की जाती हैं। भविष्य की रणनीतियाँ इस स्टेटमेंट के माध्यम से होने वाली यूनिट के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की जाती हैं।

इनकम स्टेटमेंट के लाभ और हानि

  • लाभ:
  • तुरंत निर्णय लेने के लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट की आसान तुलना करने में सहायता करता है।
  • यह कॉस्ट सेंटर और कॉस्ट सेंटर से संबंधित खर्चों को ट्रैक करने में मदद करता है।
  • यह अकाउंटिंग की एक्रूअल सिस्टम डेटा को विशिष्ट अवधियों से जोड़ने और समय-समय पर वित्तीय लेन-देन का ट्रैक रखने में मदद करती है।
  • यह विभिन्न कर और वैधानिक अनुपालनों और ऑडिट उद्देश्यों के लिए डेटा निकालना आसान बनाता है।
  • ऑपरेटिंग लीवरेज, फाइनेंशियल लीवरेज, ऑपरेटिंग मार्जिन, ब्याज कवरेज अनुपात, प्रति शेयर आय, प्रति शेयर डाईलूट किया हुआ आय, आदि जैसे विभिन्न अकाउंटिंग विश्लेषणों की गणना की जा सकती है।
  • नुकसान
  • यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है।
  • इसमें नकद और गैर-नकद व्यय शामिल हैं, इसलिए एक कैश फ्लो स्टेटमेंट और फंड फ्लो स्टेटमेंट का एक साथ अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यूनिट की लाभ को बेहतर ढंग से बताया जा सके।

निष्कर्ष 

लाभ और हानि खाता या आय और व्यय विवरण संक्षेप में एक निश्चित अवधि के लिए एक यूनिट के प्रदर्शन को दर्शाता है। यह उस अवधि में कथित राजस्व अर्जित करने के लिए यूनिट द्वारा वहन की गई लागतों की संख्या को दर्शाता है। यह सबसे अधिक मांग वाला स्टेटमेंट है जिसे उच्च प्रबंधन अतीत में रणनीति तैयार करने और कार्य योजनाओं का मूल्यांकन करने पर विचार करता है। क्रेडिट बैलेंस से लाभ का पता चलता है जबकि एक डेबिट बैलेंस नुकसान के बारे मे बताता है। 

वेरीयन्स का विश्लेषण, रेसीओ विश्लेषण, वित्तीय प्रबंधन निर्णय, लागत निर्णय, मूल्य निर्धारण निर्णय, बजट नियंत्रण आदि जैसे विभिन्न विश्लेषण इन स्टेटमेंट से तैयार किए जाते हैं। जब बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट को संयोजन के साथ देखा जाता है तो लाभ और हानि खाता किसी भी यूनिट की लाभप्रदता में कठिन अंतर्दृष्टि दे सकता है।

अब आप Biz Analyst के साथ अपनी अकाउंटिंग प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं। इस एप्लिकेशन के साथ आप अपने व्यवसाय से जुड़े रह सकते हैं और स्मार्ट डेटा-संचालित निर्णय ले सकते हैं। Biz Analyst के साथ आप मोबाइल पर टैली ईआरपी का उपयोग कर सकते हैं, ताकि आप डेटा एंट्री बना सकें, उचित कैश फ़्लो बनाए रख सकें, अपनी बिक्री का विश्लेषण कर सकें और अपनी सेल्स टीम की उत्पादकता भी बढ़ा सकें।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. लाभ और हानि खाते के माध्यम से लाभ या हानि की कैलकुलेशन करने का सूत्र क्या है?

P&L A/c का क्रेडिट पक्ष आय (Income) का प्रतिनिधित्व करता है और डेबिट पक्ष व्यय (debit) का प्रतिनिधित्व करता है।

जहां क्रेडिट पक्ष अधिक होता है वहाँ लाभ होता है, जिसकी कैलकुलेशन इस प्रकार की जाती है,

लाभ = आय - व्यय।

जहां डेबिट पक्ष अधिक होता है, वहां नुकसान होता है जिसकी गणना इस प्रकार की जाती है,

हानि = व्यय - आय।

2. ट्रेडिंग खाता कौन तैयार करता है?

एक निर्माता या व्यापारी मुख्य व्यावसायिक गतिविधियों से आय दिखाने के लिए एक ट्रेडिंग खाता तैयार करता है।

3. लाभ और हानि खाते में क्या शामिल नहीं किया जाना चाहिए?

खाते जो नॉमिनल नहीं हैं जैसे मालिक द्वारा विथ्ड्रॉ (withdraw) करना, संपत्ति में निवेश पर खर्च की गई राशि और उनके बिक्री मूल्य, नकद निकासी और जमा, आदि। केवल आय या व्यय, किसी भी लेन-देन का लाभ या हानि हिस्सा हीं प्रॉफ़िट और लॉस अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि 20,000 मूल्य की संपत्ति 15,000 में बेची जाती है। यहां पांच हजार का नुकसान हुआ है। तो 5,000 के नुकसान का केवल एक हिस्सा लाभ हानि खाते में डेबिट किया जाता है, न कि 15,000 की पूरी आय को खाते में जमा किया जाना है।

4. क्या प्राप्ति और भुगतान खाता (Receipt and Payments ) आय और व्यय खाते के समान है?

एक गैर-लाभकारी संगठन कैश फ़्लो दिखाने के लिए एक रसीद और भुगतान खाता तैयार करता है। यह दी गई अवधि में कैश इनफ़्लो और आउट्फ्लो को दर्शाता है।

हालांकि आय और व्यय का विवरण एक्रूअल के आधार पर तैयार किया जाता है। इसका मतलब है भले ही नकद ऐडवांस  में भुगतान किया गया हो, इसे तब तक व्यय नहीं माना जाएगा जब तक कि यूनिट को लागत देय न हों। इसी तरह नकद जिसका अभी तक भुगतान नहीं किया गया है या जो बकाया है, इसका मतलब यह नहीं है कि खर्च को देय नहीं है।

5. क्या लाभ और हानि खाते में बैलेंस को आगे ले जाया (carried forward) जा सकता है?

लाभ और हानि खाते में ट्रांसफर किए गए नॉमिनल खाते बंद कर दिए जाते हैं और वे खाते हर नई अवधि में नए सिरे से शुरू होते हैं। उनकी शेष राशि को अगली अकाउंटिंग पीरीअड के लिए आगे नहीं ले जाया जाता है।

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