written by Khatabook | August 27, 2021

रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS)- परिभाषा और महत्व

बैंकिंग लेन-देन के डिजिटलीकरण के साथ फंड प्राप्त करने और भेजने के कई नए तरीके सामने आए हैं। पैसे के लेन-देन का ऐसा ही एक तरीका है RTGS, जो रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट के लिए है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। आइए रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के मतलब को विस्तार से समझते हैं:

आरटीजीएस क्या है?

यह एक बैंक से दूसरे बैंक में तुरंत फंड ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया है। इसमें उच्च मूल्य के लेन-देन शामिल हैं। रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट या RTGS का मतलब है कि ट्रांजैक्शन "रीयल-टाइम" में होता है, यानी ट्रांजैक्शन या सेटलमेंट बिना किसी देरी के अनुरोधकर्ता के निर्देशों के अनुसार तुरंत होता है। और "ग्रॉस सेटलमेंट" का अर्थ है कि लेन-देन वन टू वन के आधार पर तय किए जाते हैं, न कि एक राशि को दूसरी से घटाकर या नेटिंग-ऑफ के आधार पर। इन्वेस्टोपेडिया के अनुसार आरटीजीएस की परिभाषा है - "आरटीजीएस एक केंद्रीय बैंक की पुस्तकों में क्रेडिट के साथ डेबिट को नेट किए बिना व्यक्तिगत ऑर्डर के आधार पर पेमेंट सेट लकरने की निरंतर प्रक्रिया है"।

बैंकिंग टर्म में RTGS क्या है?

बैंकिंग में RTGS का अर्थ ग्राहकों के लिए ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करके कहीं से भी फंड ट्रांसफर शुरू करने के लिए एक रीयल-टाइम फंड ट्रांसफर सिस्टम है। ग्राहक ऑफलाइन मोड का उपयोग करके भी फंड ट्रांसफर कर सकते हैं, जहां उन्हें आरटीजीएस सेवाएं प्रदान करने वाली बैंक शाखा में पैसा जमा करना होता है और आरटीजीएस सिस्टम के माध्यम से फंड ट्रांसफर का अनुरोध करने वाला एक फॉर्म जमा करना होता है।

रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) का क्या महत्व है?

रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (RTGS) आज की बैंकिंग प्रणाली में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें अधिकतम लेन-देन ऑनलाइन किए जाते हैं। तेजी से बढ़ते कारोबारी माहौल में जहां समय एक प्रमुख बाधा है और धन या धन की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय है आरटीजीएस उच्च मूल्य वाले धन लेन-देन के लिए एक तेज और सुरक्षित उपाय प्रदान करता है।

आरटीजीएस ट्रांजेक्शन क्या है?

RTGS फंड ट्रांसफर का मतलब रियल टाइम में फंड ट्रांसफर करना है। यह ग्राहक की जानकारी और धन की जालसाजी में के जोखिम को कम करता है। इसके सिस्टम की मदद से व्यवसायी कुछ ही मिनटों में एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में बड़ी मात्रा में पैसा ट्रांसफर कर सकता है, इसलिए यह सिस्टम व्यापार की लेन-देन को तेज और सुचारू बनाता है।

चूंकि लेन-देन सेटलमेंट लगभग तुरंत हो जाता है इसलिए फंड के ट्रांसफर में शामिल जोखिम काफी कम हो जाता है। आसान, तेज़ और सुरक्षित फंड ट्रांसफर प्रणाली व्यवसायों के लिए उपयुक्त है और समग्र रूप से अर्थव्यवस्था के लिए एक वरदान है। कई डिजिटल इंडिया प्रयासों में से रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय प्रणालियों में से एक है।

RTGS सिस्टम का उपयोग करके ट्रांसफर की जाने वाली न्यूनतम राशि क्या है?

RTGS सिस्टम का उपयोग करके ट्रांसफर की जाने वाली राशि 2 लाख रुपये से कम नहीं होगी। इस सीमा से कम राशि को आरटीजीएस प्रणाली का उपयोग करके ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है, हालांकि किसी अन्य मोड जैसे नेट बैंकिंग, नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर या NEFT आदि का उपयोग किया जा सकता है। रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) प्रणाली का उपयोग मुख्य रूप से उच्च-मूल्य वाले लेन-देन के लिए किया जाता है, इसलिए इस प्रणाली का उपयोग करके ट्रांसफर की राशि की कोई ऊपरी या अधिकतम सीमा नहीं है। इसका मतलब है कि भारत में 2 लाख रुपये से अधिक की कोई भी राशि RTGS प्रणाली का उपयोग करके ट्रांसफर की जा सकती है।

RTGS सिस्टम का उपयोग करने के तरीके क्या हैं?

ग्राहक निम्नलिखित दो तरीकों से आरटीजीएस प्रणाली के माध्यम से एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में धनराशि ट्रांसफर कर सकते हैं:

1. ऑनलाइन मोड- ग्राहक अपने मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करके ऑनलाइन मोड में अपनी सुविधा के अनुसार आरटीजीएस सेवा का उपयोग कर सकते हैं।

2. ऑफलाइन मोड- ग्राहक आरटीजीएस का उपयोग करके ऑफलाइन मोड के माध्यम से भी फंड ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आरटीजीएस सेवा प्रदान करने वाली बैंक शाखा में जाना होगा और नकद में ट्रांसफर करने के लिए फंड जमा करना होगा और आरटीजीएस भुगतानकर्ताओं के लिए आरटीजीएस अनुरोध फॉर्म भरना होगा। 

आरटीजीएस प्रणाली का उपयोग करके फंड ट्रांसफर करते समय क्या जानकारी चाहिए?

RTGS के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के लिए आपको निम्नलिखित जानकारी का उल्लेख करना होगा:

1. लाभार्थी का नाम, जिस व्यक्ति के खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाना है।

2. उस राशि का उल्लेख करें जिसे आपको ट्रांसफर करने की आवश्यकता है।

3. धन के प्राप्तकर्ता या लाभार्थी के बैंक का नाम।

4. प्राप्तकर्ता या लाभार्थी के बैंक नाम का IFSC कोड बताएं।

5. साथ ही लाभार्थी का खाता संख्या, जिस व्यक्ति के खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा उसका भी उल्लेख करें।

RTGS ट्रांजिशन की प्रक्रिया क्या है?

आप लाभार्थी को जोड़ने के बाद ही इस सेवा का उपयोग करके पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। लाभार्थी वह व्यक्ति होता है जिसे फंड ट्रांसफर किया जाना है या सरल शब्दों में धन का प्राप्तकर्ता। RTGS सिस्टम के तहत फंड का ट्रांसफर लाभार्थी को जोड़ने के 24 घंटे बाद ही हो सकता है। लाभार्थी को जोड़े बिना ट्रांसफर की जा सकने वाली अधिकतम राशि 50,000 रुपये है।

RTGS का उपयोग करके फंड ट्रांसफर करने के लिए चरण दर चरण प्रक्रिया का पालन करें:

1. अपना लॉगिन यूजर नेम और पासवर्ड दर्ज करके अपना नेट बैंकिंग खाता खोलें।

2. यहाँ से फंड ट्रांसफर टैब पर क्लिक करें और फिर सेलेक्ट बेनिफिशियरी टाइप फिर दूसरे बैंक में ट्रांसफर पर क्लिक करें।

3. अब आप लाभार्थी का नाम और खाता विवरण, अर्थात् बैंक का नाम, खाता संख्या और IFSC कोड दर्ज कर सकते हैं।

4. कन्फर्म करने के लिए ऐड पर क्लिक करें।

5. आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक पुष्टिकरण संदेश प्राप्त होगा।

लाभार्थी को जोड़ने के बाद RTGS सेवा के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के लिए इन चरणों का पालन करें:

1. अपने नेट बैंकिंग अकाउंट में लॉग इन करें और फंड ट्रांसफर टैब पर क्लिक करें।

2. यहां से RTGS ऑप्शन को सेलेक्ट करें।

3. उस लाभार्थी का नाम चुनें जिसे आप पैसे ट्रांसफर करना चाहते हैं।

4. वह राशि दर्ज करें जिसे ट्रांसफर किया जाना है।

5. रिक्वेस्ट सबमिट करने से पहले सारी जानकारी चेक कर लें।

आरटीजीएस प्रणाली के तहत फंड आमतौर पर अनुरोध जमा करने के 30 मिनट के भीतर प्राप्तकर्ता के खाते में ट्रांसफर या जमा किया जाता है।

आरटीजीएस प्रणाली के क्या लाभ हैं?

1. आरटीजीएस लेन-देन सुरक्षित हैं। उच्च-मूल्य वाले लेन-देन का सेटलमेंट वास्तविक समय में वन टू वन (one-to-one) के आधार पर किया जाता है। इस प्रकार ट्रांसफर के अन्य तरीकों की तुलना में जोखिम कम हो जाता है। साथ ही RTGS प्रणाली कानूनी रूप से समर्थित है और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित है।

2. भारत के भीतर फंड ट्रांसफर करने की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। ग्राहक कहीं से भी अपने मोबाइल उपकरणों और लैपटॉप पर इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर सकते हैं और इस सेवा का उपयोग किसी भी देश के अन्य बैंक खातों में फंड ट्रांसफर करने के लिए कर सकते हैं।

3. आरटीजीएस अनुरोधों को संसाधित करने में कोई देरी नहीं होती और धन को तेजी से ट्रांसफर किया जा सकता है।

4. आरटीजीएस की सेवा 24*7 आधार पर होती है। इस प्रकार सप्ताहांत और बैंक छुट्टियों पर भी रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सर्विस का उपयोग करके ऑनलाइन मोड के माध्यम से फंड ट्रांसफर किया जा सकता है, इसलिए ग्राहक कभी भी लेन-देन शुरू कर सकते हैं।

5. इस प्रणाली का उपयोग करके ट्रांसफर की जा सकने वाली राशि की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। 2,00,000 रुपये से अधिक की कोई भी राशि RTGS का उपयोग करके ट्रांसफर की जा सकती है। हालाँकि कुछ बैंक नेट बैंकिंग के माध्यम से RTGS सेवा का उपयोग करके ट्रांसफर की अधिकतम राशि पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।

नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) में क्या अंतर है?

नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में फंड ट्रांसफर करने की एक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है। भारतीय रिजर्व बैंक इसे नियंत्रित करता है। एनईएफटी और आरटीजीएस दोनों इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर सिस्टम हैं, लेकिन दोनों के बीच कुछ अंतर हैं:

NEFT

RTGS 

एनईएफटी में लेन-देन बैच-वाइज़ व्यवस्थित होते हैं।

आरटीजीएस प्रणाली में सेटलमेंट वन टू वन के आधार पर होता है।

एनईएफटी में कोई न्यूनतम सीमा नहीं है और इस प्रणाली के तहत रु.1/- जितनी कम राशि भी ट्रांसफर की जा सकती है।

आरटीजीएस लेन-देन की न्यूनतम सीमा 2,00,000 रुपये है।

एनईएफटी में आप जो अधिकतम राशि ट्रांसफर कर सकते हैं, वह कस्टमर सेगमेंट पर निर्भर करती है और आम तौर पर रु 10,00,000/- होती है। 

आरटीजीएस सिस्टम में फंड की कोई अधिकतम या ऊपरी सीमा नहीं है।

लेन-देन की बैच प्रोसेसिंग के कारण एनईएफटी प्रणाली में सेटलमेंट में कुछ देरी होती है। कभी-कभी एनईएफटी लेन-देन के निपटान में दो कार्य दिवस तक लग सकते हैं।

आरटीजीएस प्रणाली के तहत अनुरोध जमा करने के तुरंत बाद बैच प्रोसेसिंग में किसी भी देरी के बिना लेन-देन का सेटलमेंट किया जाता है।

कम और न्यूनतम मूल्य के लेन-देन के लिए एनईएफटी प्रणाली को प्राथमिकता दी जाती है।

उच्च मूल्य के लेन-देन के लिए आरटीजीएस प्रणाली बेहतर है।

तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) क्या है?

तत्काल भुगतान सेवा (Immediate Payment Service) या IMPS भी देश के शीर्ष बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है। इस प्रणाली के तहत फंड का ट्रांसफर तुरंत होता है। इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करके इस सेवा का लाभ उठाया जा सकता है।

इस प्रणाली के तहत फंड को किसी भी समय ट्रांसफर किया जा सकता है, क्योंकि यह 24 घंटे और 7 दिनों के लिए उपलब्ध होता है। सार्वजनिक छुट्टी के दिनों में भी आप इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। सेटलमेंट वन टू वन के आधार पर होता है। इस प्रणाली के तहत ट्रांसफर की जा सकने वाली न्यूनतम राशि 1,00,000 रुपये है। इससे नीचे की कोई भी राशि ट्रांसफर नहीं होती है। इस प्रणाली के तहत एक दिन के भीतर ट्रांसफर की अधिकतम राशि 2,00,000 रुपये है। तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) धन की तत्काल आवश्यकता के समय में एक बेहतर तरीका है।

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियाँ एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में धन भेजने और प्राप्त करने के सुविधाजनक और तेज़ तरीके हैं। हालाँकि NEFT, RTGS और IMPS की सेवाओं का उपयोग करते समय कुछ बातों पर विचार किया जाना चाहिए:

1. फंड ट्रांसफर के लिए शुल्क: बैंक विभिन्न प्रकार के लेन-देन पर अलग-अलग शुल्क लगाते हैं। शुल्क बैंक से बैंक और ट्रांसफर की जाने वाली राशि में भिन्न हो सकते हैं। हालांकि इन्वर्ड लेन-देन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 2,00,000 रुपये से 5,00,000 रुपये तक के लेन-देन के लिए शुल्क 24.50 रुपये से अधिक नहीं होगा और 5,00,000 रुपये से अधिक के लेन-देन के लिए शुल्क 49.50 रुपये से अधिक नहीं होगा। यह फीस बिना टैक्स की बतायी गई है। बैंक कम शुल्क ले सकते हैं लेकिन यह दी गई सीमा से अधिक नहीं होगा।

2. सेटलमेंट के लिए आवश्यक समय: एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में फंड के ट्रांसफर को पूरा करने का समय लेन-देन के सेटलमेंट के रूप में जाना जाता है। निपटान का समय बैंक दर बैंक भिन्न हो सकता है।

3. माल और सेवा कर शुल्क (जीएसटी): लेन-देन भी जीएसटी के अधीन हैं। जीएसटी शुल्क ट्रांसफर फंड की राशि पर निर्भर करता है।

4. गोपनीय जानकारी के उल्लंघन का जोखिम: इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के लॉगिन क्रेडेंशियल और पासवर्ड को सुरक्षित और गोपनीय रखा जाना चाहिए। इस जानकारी के उल्लंघन के परिणामस्वरूप धोखाधड़ी हो सकती है।

निष्कर्ष

ऑनलाइन मोड के माध्यम से अधिकतम वित्तीय लेन-देन को सक्षम करने के भारत सरकार के प्रयास के साथ फंड ट्रांसफर तेज, सुरक्षित और अधिक सुलभ हो गया है। ऑनलाइन लेन-देन को ट्रैक करना आसान है और इसलिए इसने बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ा दिया है। रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) व्यवसायों के लिए मददगार है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को भी तेज फंड ट्रांसफर सिस्टम की आवश्यकता होती है। RTGS भुगतान चेक या ड्राफ्ट के उपयोग के बिना नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करके किया जा सकता है, इसलिए आरटीजीएस अधिक राशि के ट्रांसफर के लिए एक सुरक्षित प्रणाली है।

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सामान्यत पूछे जाने वाले प्रश्न 

1. क्या मैं RTGS सिस्टम का उपयोग करके 1,00,000 रुपये ट्रांसफर कर सकता हूँ?

उत्तर। नहीं, RTGS का उपयोग केवल 2,00,000 रुपये से अधिक के लेन-देन के लिए ही किया जा सकता है।

2. क्या भविष्य की तारीख के लिए आरटीजीएस लेन-देन करना संभव है?

उत्तर। नहीं, आरटीजीएस लेन-देन भविष्य की किसी तारीख के लिए नहीं किए जा सकते।

3. लेन-देन का सबसे तेज़ तरीका कौन सा है- RTGS या NEFT?

उत्तर। NEFT की तुलना में RTGS लेन-देन का सबसे तेज़ तरीका है।

4. आरटीजीएस प्रणाली का उपयोग करके अधिकतम कितनी धनराशि भेजी या प्राप्त की जा सकती है?

उत्तर। RTGS 2,00,000 रुपये से अधिक की कोई भी राशि ट्रांसफर कर सकता है और RTGS लेन-देन के लिए कोई अधिकतम सीमा नहीं है।

5. RTGS प्रणाली का रेगुलेटर कौन है?

उत्तर। RTGS सिस्टम को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

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