written by khatabook | July 11, 2021

भारत में GST के प्रकार - CGST, SGST और IGST क्या है?

भारत में GST ने सर्विस टैक्स, वैट और एक्साइज ड्यूटी जैसे कई अन्य करों को बदल दिया है। GST अधिनियम 29 मार्च 2017 को पारित किया गया था और इसे 1 जुलाई 2017 को भारत सरकार द्वारा पारित 101 वाँ संवैधानिक संशोधन बनने के लिए लागू किया गया था। GST पूरे भारत में एक स्वतंत्र और सिंगल टैक्स कानून है। जीएसटी के विभिन्न प्रकार CGST, SGST, UTGST और  IGST हैं, और कानून पूरे देश के लिए समान हैं। GST, सप्लाई की गई वस्तुओं और सेवाओं और उनके मूल्य के आधार पर भिन्न होता है।

प्रमुख टैक्स स्लैब 0%, 5%, 12%, 18% और 28% हैं। सस्ता और आवश्यक सामान और सेवाएं 0% श्रेणी में आती हैं, जबकि अधिक महँगी और लग्जरी सामान 28% श्रेणी में आती हैं।

भारत में GST के प्रकार

भारत में GST के प्रकार अर्थात् CGST, SGST, UTGST और IGST, की विशिष्ट कर दरें हैं। ये दरें भारत सरकार द्वारा तय की गई हैं और उसी दर से लागू होंगी, जैसा सरकार द्वारा तय किया जाएगा।  

GST कितने प्रकार के होते हैं?

जीएसटी के तीन प्रकार हैं:

  • CGST (केंद्रीय माल एवं सेवा कर)
  • SGST (राज्य वस्तु एवं सेवा कर)
  • UTGST (केंद्र शासित प्रदेश माल एवं सेवा कर)
  • IGST (एकीकृत माल एवं सेवा कर)

SGST क्या है?

राज्य वस्तु और सेवा कर GST के प्रकारों में से एक है जिसे किसी विशेष राज्य की सरकार लागू करती है। राज्य सरकार राज्य के भीतर वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगाती है (इंट्रास्टेट, उदाहरण के लिए मैसूर), और राज्य सरकार एकत्रित राजस्व का एकमात्र लाभार्थी है।

  • SGST लॉटरी टैक्स, लग्जरी टैक्स, वैट, परचेज टैक्स और सेल्स टैक्स जैसे विभिन्न राज्य-स्तरीय करों की जगह लेता है।
  • हालांकि, अगर माल का लेनदेन इन्टरस्टेट (राज्य के बाहर) है, तो SGST और CGST दोनों लागू होते हैं। लेकिन, अगर राज्य के भीतर वस्तुओं और सेवाओं का लेनदेन होता है, तो केवल SGST लगाया जाता है।
  • GST की दर दो प्रकार के GST में समान रूप से विभाजित है। उदाहरण के लिए, जब व्यापारी अपने राज्य के भीतर अपनी वस्तुओं को बेचते हैं, तो उन्हें SGST और CGST का भुगतान करना होगा। SGST से अर्जित राजस्व राज्य सरकार का है और CGST से राजस्व केंद्र सरकार का।
  • विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं का SGST समय-समय पर प्रकाशित सरकारी अधिसूचना पर निर्भर करता है।

SGST की दरें

माल

SGST

आम खाद्य सामान जैसे चाय, नमक, मसाले, चीनी, आदि।

2.5%

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ

6%

इलेक्ट्रॉनिक सामान

9%

कैपिटल गुड्ज़, प्रसाधन सामग्री, आदि।

14%

CGST क्या है?

केंद्रीय वस्तु और सेवा कर वस्तुओं और सेवाओं की इंट्रास्टेट (राज्य के भीतर) सप्लाई पर लागू होता है। केंद्र सरकार इस पर टैक्स लगाती है। CGST अधिनियम इस प्रकार के GST को नियंत्रित करता है। यहाँ CGST से उत्पन्न राजस्व को SGST के साथ एकत्र किया जाता है और इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच विभाजित किया जाता है।

उदाहरण के लिए, जब कोई व्यापारी राज्य के भीतर लेनदेन करता है, तो माल पर SGST और CGST के साथ कर लगता है। GST की दर SGST और CGST के बीच समान रूप से विभाजित है, जबकि CGST के तहत एकत्र किया गया राजस्व केंद्र सरकार का है।

CGST की दरें

माल

CGST

आम खाद्य सामान जैसे चाय, नमक, मसाले, चीनी, आदि।

2.5%

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ

6%

इलेक्ट्रॉनिक सामान

9%

कैपिटल गुड्ज़, प्रसाधन सामग्री, आदि।

14%

IGST क्या है?

इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक प्रकार का GST है, जहाँ टैक्स माल और सेवाओं की इन्टरस्टेट सप्लाई पर लागू होता है। यह GST आयात और निर्यात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर भी लगाया जाता है। IGST अधिनियम इसे नियंत्रित करता है, और केंद्र सरकार IGST के संग्रह के लिए जिम्मेदार है।

एकत्रित IGST को समान रूप से केंद्र और राज्य सरकार के भागों में विभाजित किया जाता है। IGST का राज्य भाग उस राज्य को प्रदान किया जाता है, जहाँ माल और सेवाएँ प्राप्त होती हैं और बचा हुआ IGST केंद्र सरकार के पास जाता है।

उदाहरण के लिए, जब व्यापारी दो राज्यों के बीच सप्लाई करता है, तो इस मामले में IGST लगेगा।

IGST की दरें

माल 

IGST

आम खाद्य सामान जैसे चाय, नमक, मसाले, चीनी, आदि।

5%

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ

12%

इलेक्ट्रॉनिक सामान

18%

कैपिटल गुड्ज़, प्रसाधन सामग्री, आदि।

28%

UGST क्या है?

केंद्र शासित प्रदेश माल और सेवा कर केंद्र शासित प्रदेशों में वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाने वाला एक प्रकार का GST है। यह SGST के समान है लेकिन केवल केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होता है।

UGST दादर, नगर हवेली, चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार के साथ-साथ पुडुचेरी और दिल्ली में लागू है। यहाँ सरकार द्वारा एकत्र किया गया राजस्व केंद्र शासित प्रदेश सरकार का है। चूंकि UGST एसजीएसटी के लिए एक प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) है, इसलिए उन्हें CGST के साथ एकत्र किया जाता है।

GST कैसे निर्धारित किया जाता है?

  • GST माल और सेवाओं के विक्रेता और खरीदार के स्थान के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
  • CGST और SGST वस्तुओं और सेवाओं की इंट्रास्टेट सप्लाई (intrastate supply) पर लागू होते हैं। इसके विपरीत, IGST वस्तुओं और सेवाओं की इन्टरस्टेट सप्लाई (interstate supply) पर लागू होता है।
  • इस प्रकार, IGST दर CGST और SGST दरों का एक संयोजन यानि की कॉम्बिनेशन है।

GST के उद्देश्य

GST के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • अन्य करों का उन्मूलन - GST अधिनियम की शुरूआत ने अन्य अप्रत्यक्ष करों को प्रतिस्थापित किया। प्रमुख करों को GST में वर्गीकृत किया गया है।
  • सुसंगतता बढ़ाता है - MSME या छोटे पैमाने के व्यवसायों के लिए कर अनुपालन आसान है। इसके अलावा, एकल कर की उपस्थिति रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाती है।
  • पारदर्शिता बढ़ाता है - GST भ्रष्टाचार की संभावना को कम करता है और पारदर्शिता बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, व्यवसायों में गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट की संभावना कम होती है।
  • कीमत में कमी - GST बिल विशेष रूप से पिछले टैक्स ऑन टैक्स प्रणाली को समाप्त करते हुए शुद्ध मूल्य वृद्धि (वैल्यू एडेड पार्ट) वाले हिस्से पर कर लगाता है, और वस्तुओं की लागत को कम करता है।
  • देश के राजस्व को बढ़ावा देना - एक बड़ा टैक्स टू जीडीपी अनुपात सरकार के राजस्व में वृद्धि को दर्शाता है, जो एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था का संकेत देता है। इसके अलावा, व्यापक कर आधार और अधिक कर अनुपालन से GST संचालन से सरकारी आय में वृद्धि हो सकती है।
  • उच्च दक्षता और उत्पादकता - भारत में GST का उद्देश्य लॉजिस्टिक प्रतिबंधों और इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए समय लेने वाली फाइलिंग प्रक्रिया को समाप्त करना है। इसके अलावा, एंट्री टैक्स को समाप्त करने से व्यवसायों के उत्पादकता स्तर में वृद्धि की संभावना है।

GST की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  • GST भारत में सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार है। GST में विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को शामिल करने से विनिर्माण और उत्पादन लागत कम हो जाती है और देश के आर्थिक विकास में भी सहायता मिलती है।
  • राज्य के अनुसार वैट की दरें और नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी देखा गया है कि राज्य अक्सर निवेशकों को लुभाने के लिए इन दरों को कम करने की कोशिश करते हैं। इससे केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य राज्य सरकारों दोनों को राजस्व की हानि होती थी।

दूसरी ओर GST सभी राज्यों में मानक (स्टैन्डर्ड) कर नियमों को लागू करता है, जिसमें व्यवसायों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। एक पूर्व निर्धारित और पूर्व-अनुमोदित फॉर्मूले के अनुसार, इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच करों का वितरण किया जाता है। इसके अलावा चूंकि कोई भी अतिरिक्त राज्य कर नहीं है, इसलिए पूरे देश में सेवाओं और वस्तुओं को समान रूप से बेचना बहुत आसान है।

GST की विशेषताएं

  • GST के तहत पंजीकृत प्रत्येक व्यवसाय को GST अधिनियम के तहत एक वस्तु और सेवा कर पहचान संख्या (GSTIN) या एक GST संख्या प्राप्त होती है। यह GSTIN GST अधिकारियों को GST बकाया और लेन-देन का ट्रैक रखने में सहायता करता है।
  • कोई भी व्यवसाय या संगठन GST के तहत पहले पंजीकरण के बिना काम नहीं कर सकता है। अधूरा GST रिटर्न भरने से इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता है तथा साथ ही साथ जुर्माना भी लगाया जाता हैं।
  • GSTIN अनिवार्य रूप से वैधता का प्रतीक है। यह ग्राहकों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सार्वजनिक टेन्डर, वित्तीय फर्मों, कॉरपोरेट्स और अन्य के लिए आपके ब्रांड की पहचान में योगदान देता है।
  • GST एक सरलीकृत पंजीकरण योजना प्रदान करता है जिसे कंपोजिशन स्कीम के रूप में जाना जाता है। यह व्यक्तिगत व्यवसायों के लिए एक सरल और सीधी योजना है। यह समय लेने वाली GST आवश्यकताओं को समाप्त करता है और टर्नओवर की पूर्व निर्धारित दर पर GST का भुगतान करता है।
  • भारत में GST के परिणामस्वरूप कुछ नुकसान भी हुए हैं जैसे लागत में वृद्धि, विशेष रूप से सॉफ्टवेयर के व्यवसायों की परिचालन (ऑपरेशन) लागत में वृद्धि। इसलिए इसने व्यावसायिक कामकाज में जटिलता बढ़ा दी है।

निष्कर्ष

गुड्ज़ एण्ड सर्विस टैक्स (GST) ने राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा लगाए गए लगभग 17 अप्रत्यक्ष करों की जगह ले ली है। हालांकि, प्रत्येक राज्य के कर नियमों के अलग-अलग सेट के कारण, कर प्रणाली में एकरूपता की कमी थी। नतीजतन, आंतरिक व्यापार और वाणिज्य खतरे में पड़ गए, और कर चोरी एक चिंता का विषय था। जीएसटी के लागू होने से इन सभी मुश्किलों का समाधान हो गया है।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भारत में कितने प्रकार के GST हैं?

भारत में जीएसटी को 3 कैटेगरी में बांटा गया है। वे CGST (केंद्रीय माल और सेवा कर), SGST (राज्य माल और सेवा कर) / UTGST (केंद्र शासित प्रदेश माल और सेवा कर) और IGST (एकीकृत माल और सेवा कर) हैं।

2. क्या सभी जीएसटी श्रेणियां भारत में लागू हैं?

हाँ, भारत में सभी प्रकार के GST लागू हैं।

3. क्या कुछ ऐसे सामान हैं जिन्हें जीएसटी से छूट प्राप्त है?

हाँ, कुछ सामान और सेवाएं जैसे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और हाई स्पीड डीजल GST के दायरे में नहीं आते हैं।

4. क्या GST फाइल करना अनिवार्य है?

हाँ, व्यवसायों को GST रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता है। भले ही किसी निश्चित अवधि में लेन-देन कम या न के बराबर हो, आपको रिटर्न दाखिल करना होगा। अन्यथा, यह बाद के रिटर्न के साथ समस्या पैदा कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप पेनल्टी हो सकता है।

5.  CGST, SGST, IGST और UGST का फुल फॉर्म क्या हैं?

CGST का मतलब सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (Central Goods and Services tax) है, SGST का मतलब स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स है (State Goods and Services Tax), UGST का मतलब यूनियन टेरिटरी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (Union Territory Goods and Services Tax) और IGST का मतलब इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (Integrated Goods and Services Tax) है।

6. GST रिटर्न कब दाखिल करना चाहिए?

GST रिटर्न या GSTR एक रिकॉर्ड है, जिसे करदाताओं को तय तारीख के भीतर दाखिल करना होगा। रिकॉर्ड में आय, खरीद और व्यय के बारे में जानकारी होती है और यह किसी व्यक्ति के कर बोझ की गणना करने में प्रभावी साबित होता है।

7. GST की गणना कैसे की जाती है?

GST भारत में चार्जेबल बेसिस पर देय जीएसटी के योग के रूप में, इनबाउंड और आउटबाउंड माल और सेवाओं के रूप में निर्धारित किया जाता है। यह हर महीने के लिए अलग से निर्धारित किया जाता है और आपको हर महीने अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल करते समय टैक्स की गणना की गई राशि का भुगतान करना होगा।

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