टैक्स ऑडिट को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह टैक्स अधिकारियों के सामने सही खाते पेश करने में मदद करता है। इनकम टैक्स ऑडिट चार्टर्ड एकाउंटेंट्स द्वारा किए जाते हैं और 1961 के आयकर 44AB के तहत विशिष्ट परिस्थितियों में ऑडिट करना आवश्यक है।
ऑडिट का अर्थ है कि किसी संगठन के खातों का आधिकारिक निरीक्षण और एक व्यवस्थित मूल्यांकन के साथ अपनी ऑडिट रिपोर्ट तैयार करना। यह आम तौर पर एक चार्टर्ड एकाउंटेंट या स्वतंत्र बॉडी द्वारा किया जाता है, इसलिए ऑडिट रिपोर्ट रिपोर्ट की गई कर देयता यानि टैक्स लाईबिलिटी को प्रमाणित और मान्य करती है और इनकम टैक्स अधिकारियों को रिटर्न का जल्दी से आकलन करने में मदद करती है।
ऑडिट क्यों किए जाते हैं?
आयकर अधिनियम 1961 के तहत आवश्यक ऑडिट को धारा 44AB के तहत किया जाता है और इसमें निम्नलिखित में मदद मिलती है, जैसे-:
- लेखा बहियों में रखरखाव और शुद्धता। वह आम तौर पर टैक्स ऑडिटर या चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित होते हैं।
- लेखा पुस्तकों की व्यवस्थित जांच के बाद चार्टर्ड एकाउंटेंट या टैक्स ऑडिटर द्वारा देखे गए अंतर और टिप्पणियों की रिपोर्टिंग।
- आयकर कानून के कंप्लायंस, टैक्स लायबिलिटी, डिप्रीशिएशन (depreciation) आदि जैसे विवरणों की रिपोर्टिंग।
ऐसे में, 44AB की धारा के तहत ऑडिट रिपोर्ट कर अधिकारियों के लिए इंकम टैक्स रिटर्न और इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी करदाताओं, व्यक्तियों या इंडिविजुअल की टैक्स लायबिलिटी की शुद्धता को वेरीफाई करने के लिए सबसे उपयोगी है। इस प्रकार ITR का वेरिफिकेशन, रिफंड और क्लेम, डीडक्शन का प्रोसेसिंग IT अधिकारियों के लिए एक अधिक सहनीय कार्य बन जाता है।
इनकम टैक्स की धारा 44AB क्या है?
आयकर धारा 44AB के तहत निर्धारित विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने वाले व्यक्तियों पर लागू होती है। ऐसे करदाताओं को अपने खातों का चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा एक स्वतंत्र ऑडिट कराने की आवश्यकता होती है फिर वह एक ऑडिट रिपोर्ट देता है जिसे इनकम टैक्स विभाग को एक निर्धारित सेट के फॉर्म में जमा किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि निर्धारण अधिकारी यानि एसेसिंग ऑफिसर के पास व्यक्ति की कुल कर देयता यानि टेक्स लायबिलिटी और कर योग्य आय यानि टैक्सेबल इनकम का सही हिसाब है।
इनकम टैक्स की धारा 44AB कब लागू होती है?
आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत करदाता के खातों में ऑडिट नीचे सूचीबद्ध स्थितियों में लागू होता है:
- यदि किसी वित्तीय वर्ष यानि फाइनेंशियल ईयर में करदाता का कुल कारोबार या टर्नोवर या आय पिछले वित्तीय वर्ष की इनकम या टर्नोवर की परवाह किए बिना अनुमत कर योग्य सीमा (permitted taxable limit) से अधिक है।
- यदि करदाता की व्यावसायिक आय परमिटेड टैक्सेबल लिमिट से अधिक है लेकिन व्यक्तिगत आय परमिटेड टैक्सेबल लिमिट से कम है।
- यदि यह किसी ऐसे करदाता का विशेष मामला है, जिसकी टैक्सेबल इनकम परमिटेड टैक्सेबल लिमिट से कम है तो ITO या इनकम टेक्स एसेसिंग ऑफिसर IT अधिनियम की धारा 142(2A) के तहत करदाता के खातों का ऑडिट करने का आदेश देता है।
44AB इनकम टैक्स ऑडिट किसे कराना चाहिए?
नीचे दिए गए करदाताओं के लिए आयकर अधिनियम धारा 44AB का ऑडिट कराना आवश्यक किया गया है:
कोई व्यवसाय या व्यवसाय करने वाला व्यक्ति:
- मान लीजिए कि टैक्सपेयर/ पर्सन / इंडिविजुअल एक ऐसा व्यवसाय करता है, जिससे मूल्यांकन वर्ष यानि असेसमेंट ईयर से पहले किसी वित्तीय वर्ष के दौरान कुल कारोबार या अर्जित आय 1 करोड़ रुपये से अधिक हो। उस स्थिति में उन्हें अपने खातों का आयकर अधिनियम 44AB के तहत ऑडिट करवाना चाहिए।
- मान लीजिए कि टैक्सपेयर/ पर्सन / इंडिविजुअल एक ऐसा व्यवसाय कर रहा है, जिससे 44AE, 44BB और 44BBB के तहत फायदा या लाभ का उल्लेख किया गया है। यदि उन्होंने अपनी आय को फायदा या लाभ के लिए निर्धारित कर योग्य सीमा से कम घोषित किया है तो उस स्थिति में उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत अपने खातों का ऑडिट करवाना चाहिए।
- यदि टैक्सपेयर/ पर्सन / इंडिविजुअल एक व्यवसाय कर रहे हैं, जिससे फायदा या लाभ का उल्लेख 44AD के तहत किया गया है और उन्होंने घोषित किया है कि उनकी अर्जित व्यावसायिक आय फायदा या लाभ के लिए निर्धारित कर योग्य सीमा से अधिक है तो उन्हे आयकर की धारा 44AB के तहत उनके खातों का ऑडिट कराना चाहिए।
पेशा करने वाला कोई भी इंडिविजुअल या व्यक्ति:
- मान लीजिए कि टैक्सपेयर, पर्सन या पेशा करने वाला व्यक्ति मूल्यांकन वर्ष से पहले किसी भी वर्ष के दौरान 25 लाख रुपये से अधिक की ग्रोस रीसीट या इंकम अर्जित करता है। उस स्थिति में उसे आयकर अधिनियम 44AB के तहत अपने खातों का ऑडिट करवाना चाहिए।
नीचे दिए गए IT अनुभागों के तहत उल्लिखित कोई भी इंडिविजुअल या व्यक्ति:
- यदि टैक्सपेयर / पर्सन / इंडिविजुअल आयकर अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत आता है। निम्नलिखित धारा जैसे -
- गुड्स कैरेज और प्लाइंग से व्यावसायिक आय के लिए धारा 44AE
- प्रकल्पित टैक्स (Presumptive tax) पर धारा 44AD
- खुदरा कारोबार (Retail business) के लिए धारा 44AF
- सिविल कंस्ट्रक्शन (Civil construction) के कारोबार में लिप्त विदेशी कंपनियों के लिए धारा 44BBB
- अन्वेषण और खनन (Exploration and Mining) व्यवसायों के लिए धारा 44BB
ध्यान दें कि आयकर अधिनियम की धारा 44AB(e) 1 अप्रैल 2016 से प्रभावी है और इसे वित्त अधिनियम 2016 द्वारा संशोधित किया गया था। इस खंड में कहा गया है कि जिस टैक्सपेयर / पर्सन / इंडिविजुअल ने 44AD के तहत अनुमानित कराधान का विकल्प चुना है, उनके खातों का ऑडिट होना चाहिए।
इनकम टैक्स की धारा 44AB के तहत आवश्यक फॉर्म
ऑडिट करते समय धारा 44AB के तहत आवश्यक फॉर्म का उल्लेख आयकर अधिनियम - नियम 6G में किया गया है।
टैक्सपेयर, पर्सन या पेशा या व्यवसाय करने वाले व्यक्ति, जिनके खातों का ऑडिट 44AB प्रावधानों या किसी अन्य कर कानूनों के तहत कराने की आवश्यकता है, उन्हें निम्नलिखित फॉर्म का उपयोग करना चाहिए।
- ऑडिट फॉर्म या फॉर्म नंबर 3CA
- स्टेटमेन्ट और विवरण फॉर्म-3CD
वो टैक्सपेयर, पर्सन या इंडिविजुअल जिनको IT अधिनियम कानूनों को छोड़कर कानून के किसी भी प्रावधान के तहत ऑडिट करने की आवश्यकता नहीं है, उन्हे निम्नलिखित फॉर्म का उपयोग करना चाहिए-
- ऑडिट फॉर्म फॉर्म-3CB
- स्टेटमेन्ट और विवरण फॉर्म-3CD
आयकर की धारा 44AB के तहत ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करना
टैक्सपेयर, पर्सन या इंडिविजुअल को आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत अपने खातों का ऑडिट करने की आवश्यकता है और असेसमेंट के साल के 30 सितंबर तक अपनी आयकर रिटर्न और धारा 44AB इनकम टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
ऑडिट रिपोर्ट
'टैक्स ऑडिटर' या 'चार्टर्ड अकाउंटेंट' की क्षमता में ऑनलाइन लॉगिन का उपयोग करके अपनी टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करता है, इसलिए करदाता को आईटी विभाग के लॉगिन पोर्टल पर ऑडिटर या चार्टर्ड एकाउंटेंट की जानकारी देनी चाहिए। इसे करदाता द्वारा लॉगिन पोर्टल पर अस्वीकार या स्वीकार किया जा सकता है।
44AB के तहत इनकम टैक्स ऑडिट नहीं करवाने का प्रभाव
करदाताओं, व्यक्तियों, या इंडिविजुअल को धारा 44AB आयकर अधिनियम 1961 के तहत अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता है, लेकिन ऐसा करने में विफल होने पर संबंधित वित्तीय वर्ष या फाइनेंशियल ईयर में अर्जित कुल कारोबार यानि टर्नोवर का 0.5% जुर्माना अदा करने के लिए उत्तरदायी होगा। हालांकि जुर्माने की राशि 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती है।
धारा 271B - वैध कारण होने पर कोई जुर्माना नहीं
जब आयकर अधिनियम की धारा 44AB(a) के तहत करदाताओं, व्यक्तियों, या इंडिविजुअल के पास अपने खातों का ऑडिट कराने में असमर्थ होने का एक वैध कारण होता है, तो IT अधिनियम की धारा 271B के तहत कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता है। आयकर अधिनियम की धारा 44AB(a) के तहत उनके खातों का ऑडिट और जमा करने में विफलता के लिए वैध कारणों पर विचार करने वाले कारणों का उल्लेख नीचे किया गया है।
- जब अधिकृत ऑडिटर या चार्टर्ड अकाउंटेंट अपने काम से त्यागपत्र देता है, जिससे इनकम टैक्स ऑडिट पूर्ण होने में देरी या विफलता होती है।
- जब अधिकृत ऑडिटर या चार्टर्ड अकाउंटेंट की मृत्यु हो जाती है जिससे इनकम टैक्स ऑडिट पूर्ण होने में देरी या विफलता होती है।
- जब अधिकृत ऑडिटर या चार्टर्ड अकाउंटेंट को दंगों, हड़तालों, चोरी आदि जैसी घटनाओं के कारण खाता नहीं मिलता हैं, जिससे इनकम टैक्स ऑडिट पूर्ण होने में देरी या विफलता होती है।
- जब अधिकृत ऑडिटर या चार्टर्ड अकाउंटेंट को प्राकृतिक आपदाओं या आपदाओं के कारण खाता नहीं मिलता हैं, जिसके कारण इनकम टैक्स ऑडिट में देरी या विफलता होती है।
इनकम टैक्स की धारा 44AB(a) की अपडेट की हुई देय तिथि
20 मई 2021 के CBDT सर्कुलर ने AY या असेसमेंट ईयर 2021- 2022 के लिए कुछ प्रत्यक्ष कर अनुपालन के लिए देय तिथियों और अनुपालन तिथियों को बढ़ा दिया है। इनका उल्लेख नीचे किया गया है।
मानदंड |
ITR फाइल करने की तारीख |
उन करदाताओं के लिए जिनके खातों का ऑडिट करने की आवश्यकता नहीं है |
31 जुलाई 2021 से 30 सितंबर 2021 तक बढ़ा दिया गया |
आयकर अधिनियम के 44AB(a) के तहत ऑडिट के लिए |
30 नवंबर 2021 |
ट्रांसफर प्राइसिंग के लिए |
31 दिसंबर 2021 |
रिवाइज या बेलेटेड रिटर्न रिटर्न के लिए |
31 दिसंबर 2021 से 31 जनवरी 2022 तक |
उन मामलों के लिए जहां ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है |
आयकर अधिनियम के तहत तिथि 31 अक्टूबर 2021 निर्धारित की गई है। |
उन मामलों के लिए जहां ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है |
आयकर अधिनियम के तहत तिथि 30 नवंबर 2021 निर्धारित की गई है। |
केंद्रीय बजट 2021 में बदलाव
2021 का केंद्रीय बजट-
- केवल ब्याज आय और पेंशन आय अर्जित करने वाले 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को दाखिल करने से छूट प्रदान करता है।
- आयकर अधिनियम 1961 की धारा 44AB(a) के तहत 1 करोड़ रुपये की सीमा 44AB के तहत टैक्स ऑडिट के लिए विचाराधीन है और इसे वित्त वर्ष 2019-2020 या असेसमेंट ईयर 2020- 2021 से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। यह तब लागू होगा, जब करदाता की नकद प्राप्तियां टर्नओवर या ग्रोस रिसिप्ट के 5% से अधिक न हों या करदाता का नकद भुगतान कुल भुगतान के 5% से कम हो।
निष्कर्ष:
आयकर अधिनियम की 44AB एक महत्वपूर्ण धारा है, जो विशिष्ट करदाताओं के खातों की पुस्तकों के ऑडिट से संबंधित है। हमने संक्षेप में विभिन्न शर्तों का अध्ययन किया है, जैसे- कब ऑडिट अनिवार्य है, ऑडिट रिपोर्ट कैसे दर्ज की जाती है और IT कानूनों, केंद्रीय बजट और CBDT निर्देशों में नवीनतम अपडेट क्या है। आपकी टेक्स लायबिलिटी और खातों की गलती को वेरीफाई करने के लिए ऑडिट एक बहुत ही उपयोगी उपकरण है। अपेक्षित ITR के साथ समय पर ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर जुर्माना लगता है। इस प्रकार सभी करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी ऑडिट रिपोर्ट और ITR को उल्लिखित तय तारीखों तक दाखिल करें। हमने ऊपर इन तय तिथियों का नवीनतम अपडेट भी उल्लेख किया है।