written by khatabook | September 2, 2021

ट्रायल बैलेंस: उदाहरण के साथ नियमों को समझें

ट्रायल बैलेंस क्या है? ट्रायल बैलेंस, बैंक बैलेंस, कैश बुक आदि जैसे कई लेज़र खातों से निकाले गए क्रेडिट और डेबिट बैलेंस का योग या सूची है। ट्रायल बैलेंस का बुनियादी नियम यह है कि ट्रायल बैलेंस डेबिट और क्रेडिट अकाउंट और लेजर से लिया गया  बैलेंस एक समान या बराबर होना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रत्येक लेन-देन में क्रेडिट और डेबिट एंट्री होती है या दोहरे परिणामों के साथ प्रभाव होता है। जब एक अकाउंटिंग पीरियड समाप्त होती है या प्रत्येक महीने के अंत में जब खाता को मिलाया जाता है और विधिवत निकाला जाता है तो यह ट्रायल बैलेंस ही टेस्ट करता है कि कुल क्रेडिट और कुल डेबिट एक व्यवस्थित पैटर्न में हैं या नहीं। यदि नहीं तो लेज़र एंट्री में कोई एरर या अशुद्धि है। यह प्राथमिक खाता विवरण है, जिसमें से कई फाइनेंशियल स्टेटमेंट जैसे बैलेंस शीट या पी एंड एल या ट्रेडिंग और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट और भी खाता तैयार किया जाता है।

ट्रायल बैलेंस के उद्देश्य:

ट्रायल बैलेंस का उपयोग लेज़र और जर्नल एंट्री से फाइनेंशियल स्टेटमेंट तैयार करने के लिए किया जाता है। यह फाइनेंशियल स्टेटमेंट जैसे बैलेंस शीट आदि और फाइनल पी एंड एल खातों को तैयार करने का आधार है। ट्रायल बैलेंस फॉर्मैट और इसके उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • कुल ऋण के कुल क्रेडिट के बराबर होने पर लेजर खातों की अंकगणितीय सटीकता का आकलन करना।
  • लेखा प्रणाली के कई चरणों में लेजर और जर्नल त्रुटियों या अक्षमताओं का पता लगाना। कई एंट्री के साथ लेज़र या जर्नल खातों को पोस्ट करना, मूल्यों को दर्ज करने में गणना या मैन्युअल एरर, सहायक लेज़रों / जर्नल का योग करते समय, ट्रायल बैलेंस पोस्टिंग एरर, आदि ऐसी गलतियाँ हो सकती हैं।
  • विभिन्न फाइनेंशियल स्टेटमेंट जैसे पी एंड एल खाता, बैलेंस शीट, अन्य फाइनेंशियल स्टेटमेंट, अकाउंटिंग रिकॉर्ड आदि तैयार करना।
  • खर्चे और इनकम की एंट्री पी एंड एल खाते के लिए लेजर अकाउंट से ली जाती हैं। 
  • बैलेंस शीट के लिए जर्नल एंट्री आवश्यक हैं।

इस प्रकार ट्रायल बैलेंस, फाइनेंशियल स्टेटमेंट और विभिन्न अकाउंटिंग रिकॉर्ड के बीच ब्रिज की तरह है।

ट्रायल बैलेंस की विशेषताएं:

  • ट्रायल बैलेंस खातों का विवरण है न कि अपने आप में एक खाता। यह कभी भी फाइनल फाइनेंशियल स्टेटमेंट का हिस्सा नहीं होता है।
  • इसमें ट्रायल बैलेंस फॉर्मेट में कई लेज़र खातों से निकाले गए क्रेडिट और डेबिट बैलेंस का योग होता है।
  • इसका उद्देश्य अपनी एंट्री की अंकगणितीय सटीकता को साबित करना है क्योंकि ट्रायल बैलेंस में क्रेडिट और डेबिट बैलेंस बराबर होते हैं। हालांकि यह अशुद्धियों को सत्यापित नहीं करता है जिसके लिए क्रेडिट/डेबिट बैलेंस में अशुद्धि साबित करने के लिए एक ऑडिट की आवश्यकता होती है।
  • प्रत्येक लेखा वर्ष के अंत में एक ट्रायल बैलेंस बनाया जाता है। यदि आवश्यक हो तो ट्रायल बैलेंस शीट, मासिक, अर्ध-वार्षिक, क्वार्टरली या साप्ताहिक भी तैयार की जा सकती है।
  • यह सभी अकाउंट स्टेटमेंट का फाउंडेशन है और लाभ हानि खाते, अकाउंट और बैलेंस शीट को जोड़ने वाला ब्रिज है।

ट्रायल बैलेंस के प्रकार:

विभिन्न अकाउंटिंग स्टेज में तीन अलग-अलग प्रकार के ट्रायल बैलेंस हैं।

तीन ट्रायल बैलेंस हैं-

  • एडजस्टेड ट्रायल बैलेंस (Adjusted Trial Balance)
  • अनएडजस्टेड ट्रायल बैलेंस (Unadjusted Trial Balance) 
  • पोस्ट क्लोजर ट्रायल बैलेंस (Post closure Trial Balance)

ट्रायल बैलेंस बनाने के नियम:

ट्रायल बैलेंस के नियम हैं-

  • सभी लायबिलिटी क्रेडिट पक्ष में और एसेट्स डेबिट पक्ष पर दिखाई देनी चाहिए।
  • लाभ और इनकम, ट्रायल बैलेंस के क्रेडिट पक्ष पर दिखाई देनी चाहिए।
  • ट्रायल बैलेंस के डेबिट पक्ष पर खर्च दिखाई देनी चाहिए।

ट्रायल बैलेंस में गलतियाँ:

ट्रायल बैलेंस यह सुनिश्चित करता है कि डेबिट और क्रेडिट एंट्री अंकगणितीय सटीकता के साथ मेल खाती हैं, लेकिन वे लेजर की सटीकता को नहीं बताती हैं। आइए कुछ गलतियों का पता लगाएं, जो ट्रायल बैलेंस में हो सकती हैं।

एरर ऑफ कमीशन (Errors of Commission): ये गलती तब होती हैं जब सही राशि, खातों के सही वर्ग में तो होती है लेकिन गलत खाते में। उदाहरण के लिए, मिस्टर C ने मिस्टर X को 1000/- रुपये का माल बेचा और उन्हें मिस्टर Y के खाते में बेचे गए माल के रूप में दर्ज किया।

एरर ऑफ ओमिशन (Errors of Omission): ये गलती ऐसी गलती हैं जहां लेनदेन रिफ्लेक्ट नहीं होता है या पूरी तरह से छोड़ दिया जाता है। उदाहरण के लिए यदि 1000/- रुपये का माल Mr. B को बेचा गया था और खातों में एंट्री से पूरी तरह से छूट गया था तो ट्रायल बैलेंस अभी भी डेबिट और क्रेडिट को मैच के रूप में दिखाएगा, क्योंकि 1000/- के लिए डेबिट और क्रेडिट दोनों को ट्रायल बैलेंस में कम करके दिखाया गया है। 

एरर ऑफ प्रिंसिपल (Errors of Principle): ये लेन-देन सही राशि को दर्शाते हैं लेकिन गलत पक्ष और खातों के वर्ग पर। उदाहरण के लिए, एक अचल संपत्ति कार की ख़रीद गलत तरीके से मोटर वाहनों के व्यय खाते, एक राजस्व व्यय खाते में रिफ्लेक्ट होती है।

कंपेंसेटिंग एरर (Compensating Errors): ये गलती तब होती हैं जब दो या दो से अधिक समान मूल्य वाले खाते क्रेडिट और डेबिट दोनों पक्षों पर होते हैं। उदाहरण के लिए फिक्स्ड एसेट खाते में 50,000/- रुपये डेबिट करने के बजाय, बिक्री खाते में (क्रेडिट खाता) रुपये 50,000/- क्रेडिट कर दीया जाता है।

रिवर्सल ऑफ एंट्री (Reversal of entries): यह गलतीयाँ सही खातों को गलत स्थान पर दर्ज करने से होती हैं। इस मामले में ट्रायल बैलेंस अभी भी बराबर रहेगा। उदाहरण के लिए Mr. A से 20,000 रुपये मिला और उसे गलत तरीके से उसके अकाउंट में डेबिट कर दिया गया और कैश बुक के लिए एक क्रेडिट एंट्री पास कर दी की गई थी।

एरर ऑफ ट्रांसपोजीशन (Errors of transposition): ये एंट्री तब होती हैं जब सही एंट्री के न्यूमेरिकल वैल्यू गलत तरीके से ट्रैन्स्पोज़ वैल्यू के साथ लिखे जाते हैं। उदाहरण के लिए 4523/- के स्थान पर 4235/- रुपये गलती से लिखा गया।

ट्रायल बैलेंस शीट तैयार करने के स्टेप:

फाइनल फाइनेंशियल स्टेटमेंट को तैयार करने का पहला चरण ट्रायल बैलेंस है, जहां जेनरल लेजर अकाउंट से क्लोज़िंग बैलेंस के स्टेटमेंट से ट्रायल बैलेंस तैयार किया जाता है। ट्रायल बैलेंस तैयार करने के चरण हैं:

  • सबसे पहले लेजर अकाउंट और उसमें प्रत्येक खाते का क्लोज़िंग बैलेंस तैयार करें। उदाहरण के लिए ट्रायल बैलेंस में बैंक ओवरड्राफ्ट, ट्रायल बैलेंस में प्राप्त कमीशन और फाइनल अकाउंट में सामान्य खर्च, और अन्य।
  • अब इन बैलेंस को ट्रायल बैलेंस के क्रेडिट और डेबिट कॉलम में पोस्ट करें।
  • खर्च और ऐसेट का अकाउंटिंग डेबिट बैलेंस के रूप में किया जाता है, जबकि इनकम और लायबिलिटी को क्रेडिट बैलेंस माना जाता है।
  • इसके बाद कुल डेबिट और क्रेडिट बैलेंस की गणना करें।
  • अगर ट्रायल बैलेंस सही है तो क्रेडिट और डेबिट बैलेंस का योग बराबर होना चाहिए।
  • बैलेंस में किसी भी अंतर के मामले में आपको खातों के ऑडिट के माध्यम से ट्रायल बैलेंस एरर सुधार करना चाहिए।

ट्रायल बैलेंस फॉर्मैट और उदाहरण:

नीचे दिए गए एक फर्म के ट्रायल बैलेंस फॉर्मैट पर नज़र डालें।

जैसा कि ऊपर दिखाया गया है पहले कॉलम में लेजर खातों का उल्लेख किया गया है और उनकी विभिन्न एंट्री को संबंधित कॉलम में क्रेडिट या डेबिट एंट्री के रूप में दिखाया गया है।

ट्रायल बैलेंस का फॉर्मैट:

ABC लिमिटेड का ट्रायल बैलेंस dd/mm//yy के अनुसार।

SI No

Particulars

L.F

Amount (Rs)Dr

Amount (Rs)Cr

         

ट्रायल बैलेंस का उदाहरण:

ABC लिमिटेड ट्रायल बैलेंस 31- मार्च 2020 (डॉलर में)

Accounts

Debit (Dr)

Credit (Cr)

Cash

1,20,280

-

Accounts Receivable

9,500

-

Office Expenses

2,500

-

Prepaid Rent

800

-

Prepaid Insurance

220

-

Office furniture and equipment

15,000

-

Bank loan

-

15,000

Accounts Payable

-

5,000

Unearned Revenues

-

9,500

Capital

-

1,21,200

Drawings

5,000

-

Commission Revenue

-

12,500

Salary Expenses

9,900

-

Total

163,200

163,200

ट्रायल बैलेंस फॉर्म:

ट्रायल बैलेंस को नीचे दो फॉर्म में निकाला जा सकता है। अर्थात्

  • लेजर फॉर्म जहां ट्रायल बैलेंस क्रेडिट और डेबिट पक्षों वाले खाते के रूप में डाला जाता है। दोनों पक्षों के पास खाता नाम, राशि कॉलम, फोलियो कॉलम इत्यादि वाला पहला कॉलम होता है।
  • जर्नल फॉर्म जहां ट्रायल बैलेंस जर्नल फॉर्म लेता है जिसमें सीरियल नंबरिंग, खाता नाम, डेबिट/क्रेडिट राशि, लेजर फोलियो विवरण इत्यादि के लिए एक कॉलम होता है, जिसमें पेज नंबर भी शामिल होता है जिस पर अकाउंट, लेजर में दर्ज किया जाता है।

हालांकि ट्रायल बैलेंस में प्रत्येक देनदार (Debtor) के साथ एंट्री की दोहरी प्रकृति के कारण एक समान क्रेडिट एंट्री या इसके विपरीत प्रत्येक लेनदार (Creditor) के साथ एंट्री की दोहरी प्रकृति के कारण एक समान डेबिट एंट्री होने पर ट्रायल बैलेंस जब सही हो तो हमेशा मेल खाना चाहिए।

ट्रायल बैलेंस आइटम की सूची:

जैसा कि ट्रायल बैलेंस के फॉर्मैट में देखा गया है, इसमें कई क्रेडिट और डेबिट खाते हैं। उन्हें वर्गीकृत करने में सहायता करने के लिए यहां एक तालिका दी गई है।

डेबिट

क्रेडिट 

Total Assets (Cash in bank/ hand, Buildings and Land, Inventory, Plant and Machinery, and more.)

Expenses (Freight, inward carriage expenses, rents, salary, rebates, Commission, etc.)

ट्रायल बैलेंस में सन्ड्री डेटर

Losses (Inward returns, bad debts, depreciation, debits to P&L A/c, etc.)

 

Purchases

Total liabilities (Unsecured/ Secured loans, Bank overdrafts, mortgage loans, outstanding bills and expenses payable, and more.)

Reserves in funds, depreciation provisions, general reserves, accumulated depreciation on plant and machinery, etc.

Sundry Creditors

Gains (Outward returns, recovered bad debts, discount received, credits to P&L, etc.)

Sales

अकाउंटिंग और ट्रायल बैलेंस में आधुनिक समय की प्रगति:

ट्रायल बैलेंस किसी भी त्रुटि का सही पता लगाने में मदद करता है। लेकिन व्यवसाय की जरूरतें अधिक विविध होने के साथ, फाइनेंशियल स्टेटमेंट को व्यावसायिक स्वास्थ्य और फन्डिंग के साथ संरेखित करने की आवश्यकता है ताकि प्रभावी निर्णय किए जा सकें। अधिकांश व्यवसाय अपनी बुक्स को बनाए रखने के लिए, फाइनेंशियल रिपोर्ट और स्टेटमेंट तैयार करने और विश्लेषणात्मक (analytical) रिपोर्ट के लिए फाइनेंशियल डेटा का उपयोग करने के लिए एडवांस अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर जैसे टैली प्राइम, टैली ईआरपी 9 आदि का उपयोग करते हैं। 

ऐसे में, आपको ट्रायल बैलेंस शीट बनाने के लिए अब क्रेडिट और डेबिट को बैलेंस करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि टैलीप्राइम एक अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से लेन-देन रिकॉर्ड करते समय क्रेडिट और डेबिट के मैच को सुनिश्चित करता है। यह प्रयास, समय, संसाधन आदि की बचत करते हुए लेनदेन को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करने का एक अधिक कुशल, विश्वसनीय, सटीक तरीका भी है।

निष्कर्ष:

इस लेख में हमने देखा कि ट्रायल बैलेंस कैसे तैयार किया जाता है, ट्रायल बैलेंस उदाहरणों के साथ टैली में ट्रायल बैलेंस क्या है। क्या आप एक अकाउंटिंग सॉल्यूशन Biz Analyst के बारे में जानते हैं, जहाँ आप अपनी अकाउंटिंग की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं? टैली उपयोगकर्ताओं के लिए इस एप्लिकेशन का उपयोग डेटा एंट्री करने, पेमेंट रिमाइंडर भेजने और उचित कैश फ़्लो बनाए रखने जैसे विभिन्न कार्यों के लिए किया जा सकता है। यह बिक्री के विश्लेषण में भी सहायता करता है जिसके माध्यम से व्यवसाय के विकास के लिए महत्वपूर्ण डेटा-संचालित निर्णय लिए जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

1. जनरल लेज़र से क्या तात्पर्य है?

जनरल लेजर किसी भी अवधि में वित्तीय खाता लेनदेन और एंट्री को निर्धारित लेजर फॉर्मैट में जल्दी से अवधि के क्लोज़िंग बैलेंस का पता लगाने के लिए सारांशित करता है। लेजर या जर्नल खातों की प्राइमरी अकाउंट है। इसमें रियल, पर्सनल, और नॉमिनल खाते शामिल हैं और उनके तहत पास की गई एंट्री राशि कॉलम में क्रेडिट / डेबिट के रूप में राशि दर्शाती हैं।

इसके दो पहलू हैं अर्थात् प्रत्येक खाते के दाईं ओर क्रेडिट और बाईं ओर डेबिट, दिनांक, फोलियो या पृष्ठ संख्या जिस पर खाता दिखाई देता है और खाते का विवरण। यहाँ बताया गया है कि यह कैसा दिखता है।

Date

Particulars

Journal Folio

Amount (Rs.)

Date

Particulars

Journal Folio

Amount (Rs.)

               
               
                 

2. इन्वेंटरी में ट्रायल बैलेंस कैसे तैयार करें?

इन्वेंटरी फिजिकल आइडल गुड्स का उपलब्ध स्टॉक है, जिसका मौद्रिक मूल्य संगठन द्वारा कच्चे माल, पैक्ड स्टॉक, पैकेजिंग में स्टॉक, प्रोसेसिंग आदि के रूप में रखा जाता है। इन्वेंटरी अपूर्ण या पूर्ण अवस्था में हो सकती है और निकट भविष्य में उपयोग की जाती है। यह बिक्री की सूची, मरम्मत किए गए सामान, दोषपूर्ण सामान, कई प्रक्रियाओं में माल आदि का मूल्यांकन करके तैयार किया जाता है।

3. लाभ और हानि खाते से क्या अभिप्राय है?

लाभ और हानि खाता एक फाइनेंशियल स्टेटमेंट है जो अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के आधार पर अकाउंटिंग पीरीअड के नुकसान और लाभ को मापता है और एंटरप्राइज के वित्तीय स्वास्थ्य या फाइनेंशियल हेल्थ को दर्शाता है। इसे व्यय (Expense) और इनकम स्टेटमेंट के रूप में भी जाना जाता है। यह ट्रायल बैलेंस शीट को अपने आधार के रूप में उपयोग करता है।

4. ट्रायल बैलेंस में बैड डेट्स (Bad Debts) का क्या अर्थ है?

बैड डेट्स संगठन के ऋण हैं जिनको रिकवर नहीं किया जा सकता या अपरिवर्तनीय हैं। व्यापार के संदर्भ में बैड डेट्स कंपनी के लिए एक नुकसान है और इसलिए इसे सीमित किया जाना चाहिए। इसे P&L खाते के लॉस साइड में ट्रांसफर कर दिया जाता है और ट्रायल बैलेंस शीट में इसके मुनाफे से वसूली योग्य एंट्री के रूप में भी रिफ्लेक्ट होता है।

5. ट्रायल बैलेंस में लेनदार/देनदार (Creditors/Debtors) कौन हैं?

व्यवसाय पैसे और नकदी के आउट्फ्लो/इन्फ्लो पर चलते हैं। लेनदार और देनदार हमेशा व्यवसाय के कैश फ़्लो और कुशल कामकाजी उपयोग को आकार देने में शामिल होते हैं। एक व्यक्ति जो क्रेडिट पर फर्म को सेवाओं या सामानों की आपूर्ति करता है वह एक सन्ड्री क्रेडिटर है। इसी तरह एक सन्ड्री डेटर वह व्यक्ति होता है जिसे फर्म क्रेडिट पर सेवाओं या सामानों की आपूर्ति करती है। ये एंट्री ट्रायल बैलेंस और P&L खाते में पाई जा सकती हैं।

6. संचित मूल्यह्रास (Accumulated Depreciation) का क्या अर्थ है?

टूट-फूट और उपयोग के कारण सभी संपत्तियों का जीवनकाल सीमित होता है और उनका मूल्य कम होता है। इसे मूल्यह्रास कहा जाता है। संचित मूल्यह्रास का अर्थ है निर्दिष्ट अवधि के लिए किसी कंपनी की इसकी संपत्ति पर कुल मूल्यह्रास राशि।

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