written by | March 21, 2022

क्रेडिट स्कोर और बेसिक लोन के बारे में जाने

लोन अप्लाई करते समय क्रेडिट इन्फोर्मेशन ब्यूरो ( इंडिया) लिमिटेड - (CIBIL) स्कोर को क्रेडिट रिपोर्ट बनाते वक्त  बैंक द्वारा जांचा जाता है, जिसे भी पर्सनल लोन चाहिए, उसे लोन के किए सिबिल स्कोर क्या है उसे समझना होगा। यह आपकी योग्यता, ब्याज दर और लोन की राशि को निर्धारित करता है। ऑर्गनाइजेशन और लोगो द्वारा बहुत तरह के लोन को अप्लाई किया जाता है। लोन प्रोसेस में क्या होता है और उसकी पेमेंट कैसे की जाती है। इन सब चीज़ों से आपको परिचित होना होगा। सिबिल बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए डाटा देने का काम करता है और यह क्रेडिट की जानकारी का डाटाबेस भी है।

CIBIL स्कोर कैसे काम करता है?

सिबिल स्कोर में तीन संख्या का का एक समरी होता है, जो आपके पुराने लोन और पेमेंट का रिकॉर्ड रखता है।

  • यह जानने के लिए कि CIBIL स्कोर कैसे काम करता है, क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड या CIBIL किसी व्यक्ति की क्रेडिट जानकारी को ध्यान में रखता है, जिसके आधार पर बाद में उसे क्रेडिट स्कोर दिया जाता है।
  • एक व्यक्ती की साख की योग्यता को 300 से 900 के बीच स्केल किया जाता है।
  • 900 से अधिक CIBIL स्कोर करने वाला व्यक्ति अनुकूल शर्तो पर लोन ले सकता है। जितना अधिक स्कोर होगा लोन मिलने की संभावना उतनी ही आसान होगी।
  • ज्यादातर लोन देने वाले लेंडर 750 के स्कोर को अच्छा स्कोर समझते है जिससे किसी व्यक्ती को लोन मिलने में आसानी होती है।

CIBIL स्कोर उनके लिए जिन्होंने कभी लोन नहीं लिया है

सभी क्रेडिट पॉलिसी लोन दिए गए राशि पर एक लिमिटेशन के साथ बनती है। ज्यादातर लेंडर उनको लोन देने से दूर रहते है जिनका स्कोर NH या NA होता है।

  • सिबिल में NA स्कोर बताता है की इस व्यक्ति ने कभी लोन नहीं लिया है।
  • सिबिल स्कोर में NH बताता है की व्यक्ति के पास किसी भी क्रेडिट या डिफॉल्ट पेमेंट का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है।

क्रेडिट रिपोर्ट चेक का क्या मतलब है?

जब आप लोन अप्लाई करते है तब आपके सभी डिटेल्स को Equifax नाम की क्रेडिट ब्यूरो को भेज दिया जाता है। यह ब्यूरो लोन लेने वाले की सारी क्रेडिट एक्टिविटी को एक्सेस कर सकता है। इसके आधार पर यह उचित क्रेडिट स्कोर और साथी ही साथ क्रेडिट रिपोर्ट तैयार करता है। यह रिपोर्ट्स लोन लेने वाले को अपने वर्तमान क्रेडिट स्टेटस को समझने का एक आइडिया देता है। दरअसल यह बताता है की किस तारीख को आपने लोन लिया था,सटीक लोन राशि, उनका रेवेन्यू बैलेंस और साथ ही पूरी पेमेंट हिस्ट्री। यहाँ तक कि अगर आपने अगर पहले कभी कर्ज चुकाया है तो अपने कितना समय लिया चुकाने में, सब कुछ क्रेडिट हिस्ट्री में दिखता है। किसी भी व्यक्ति को चिंता नहीं करनी चाहिए, अगर सिबिल स्कोर चेक करने से अंक कम हो जाएंगे।

सिबिल स्कोर रेंज और यह क्या होता है?

सिबिल स्कोर रेंज

हर एक रेंज का मतलब

0 or -1

जीरो सिबिल स्कोर बताता है कि आवेदक का क्रेडिट हिस्ट्री 6 महीने से कम है। इसका मतलब व्यक्ती 300 से 900 के बीच का स्कोर नही ले सकता। इस स्कोर को "NA" कहा जाता है

CIBIL स्कोर (माइनस 1) -1 बताता है कि आवेदक के पहले के क्रेडिट हिस्ट्री पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसे "NH" कहा जाता है।

300 to 550

300 से 550 के बीच के क्रेडिट स्कोर को लोन लेने के हिसाब से अच्छा स्कोर नही माना जाता है। संभवतन लोन अप्लाई करने वाले को नए लोन की मंजूरी नहीं मिलती है। लेंडर ऐसे व्यक्तियों को लोन देने से परहेज करते हैं, क्योंकि इसमें भुगतान न करने का जोखिम ज्यादा होता है। कोई भी भुगतान जो समय पर नहीं किया गया है या पेमेंट की ड्यू डेट से आगे नहीं किया गया है, उसे कम सिबिल स्कोर दिया जाता है।

550 to 650

550 से 650 की सीमा में क्रेडिट स्कोर थोड़ा अनुकूल रूप से देखा जाता है। यह बताता है कि लोन लेने वाला अपने लोन को चुकाने में सक्षम हैं, भले ही थोड़ी देर के बाद भी। हालाँकि, ऐसे लोन लेने वाले को लोन देने से भी मना किया जा सकता है। कुछ मामलों में, यदि उन्हें लोन दिया जाता है, तो उनसे बहुत अधिक ब्याज दर वसूल की जाती है।

650 to 750

650 से 750 के बीच के क्रेडिट स्कोर को बहुत अच्छा माना जाता है और लोन मिलने की संभावना अधीक रहती है, लेकिन रिस्क इन मामलों में भी बना रहता है और इसलिए बॉरोवर लोन का अधिकांश लाभ नहीं उठा सकते जो की वो चाहते है।

750 to 900

750 से 900 के बीच के क्रेडिट स्कोर को सबसे अच्छा माना जाता है, जो बॉरोअर को लोन लेने योग्य बनाता है। यह स्कोर बताता है कि बॉर्रोवर का रिकॉर्ड लोन वापस करने के लिहाज से बहुत अच्छा है। इस स्कोर के बॉरोवर आसानी से बहुत लाभ उठा सकते है। जैसा कि जल्द लोन का मिलना, क्रेडिट कार्ड का आसानी से मिलना, कम ब्याज की दर और साथ ही अनेकों लाभ।

आप अपने सिबिल क्रेडिट स्कोर को कैसे एक्सेस कर सकते हैं?

आप अपने क्रेडिट स्कोर को जानने के लिए सिबिल के आधिकारिक पोर्टल को मुफ्त में या सब्सक्रिप्शन प्लान सिलेक्ट करके एक्सेस कर सकते हैं।

  • एक व्यक्ति को पहले सिबिल के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा और 'Get Your CIBIL Score’(गेट योर सिबिल स्कोर)' पर क्लिक करना होगा। अगला पेज जो दिखाई देगा, उसमें सब्सक्रिप्शन ऑप्शनऔर एक फ्री ऑप्शन शामिल है।
  • आपको अपने सभी जरूरी विवरण जैसे ईमेल आईडी, यूजरनेम, पासवर्ड, आईडी प्रूफ (वोटर आईडी, पैन कार्ड, आधार आदि), जन्म तिथि, पिन कोड और फोन नंबर देकर एक अकाउंट बनाना होगा।  ‘Accept (एक्सेप्ट) एंड Continue (जारी) पर क्लिक करें।
  • पूरे प्रोसेस में आइडेंटिटी वेरिफिकेशनशामिल है जो लोन लेने वाले के मोबाइल नंबर पर भेजे गए वन-टाइम पासवर्ड के माध्यम से किया जाता है।
  • अगले स्टेप में, एक व्यक्ति एक नई विंडो में अपने एनरोलमेंट की कन्फर्म कर सकता है। व्यक्ति को कन्फर्म के लिए एक ईमेल मिलता है और बाद में क्रेडिट स्कोर की जांच करने के लिए, Go to Dashboard’ ('गो टू डैशबोर्ड) पर क्लिक करना होगा।
  • व्यक्ति को myscore.cibil.com पर जाना होगा। साइट में व्यक्ति अन्य सब्सक्राइबर की तरह अपना मुफ्त सिबिल स्कोर और सिबिल रिपोर्ट देख सकता है।

सिबिल रिपोर्ट को पढ़ना और उसकी व्याख्या करना:

सिबिल क्रेडिट रिपोर्ट के विवरण को समझने के लिए नीचे दिए गए छह सेक्शन को समझना महत्वपूर्ण है।

  • CIBIL स्कोर - 765 से ऊपर का क्रेडिट स्कोर या जहां व्यक्ति को एक अच्छा उधारकर्ता माना जाता है, उसे CIBIL द्वारा फेवरेबल माना जाता है। नॉट अवेलेबल या नो हिस्ट्री के सिबिल स्कोर से संबंधित मिथकों को नजरअंदाज किया जा सकता है।
  • व्यक्तिगत जानकारी (पर्सनल डीटेल्स) - नाम, जन्म तिथि, पर्मानेंट अकाउंट नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर आदि कुछ पर्सनल डिटेल्स हैं, जो CIBIL द्वारा सटीकता और वास्तविकता के प्रमाण के रूप में लिए जाते हैं। पिछले लोन लेंडर से इकट्ठा किए गए डेटा को इसकी सटीकता साबित करने के लिए ‘e’  के साथ चिह्नित किया जाता है।
  • कॉन्टेक्ट की जानकारी (कॉन्टेक्ट इन्फोर्मेशन) - एक व्यक्ति का टेलीफोन नंबर, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी इसमें दिखाई देता है, जैसा कि लेंडर द्वारा बताया गया है। इस प्रमाण से किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान का पता लगाया जा सकता है।
  • रोजगार की जानकारी (एम्प्लॉयमेंट इन्फोर्मेशन)- इस सेक्शन में  एक व्यक्ति का रिकॉर्ड और उन सभी नौकरियों और कंपनियों का डेटा उपलब्ध है जिनमे उन्होंने काम किया है। कंपनियों में उन्होंने कितनी बार नौकरी बदली है इस रिकॉर्ड की जांच की जाती है।
  • खाता की  जानकारी (अकाउंट इन्फोर्मेशन) - एक क्रेडिट रिपोर्ट के सबसे जरूरी सेक्शन जिसमें किसी व्यक्ति के सभी पिछले और चल रहे लोन और क्रेडिट कार्ड के विवरण शामिल हैं। एक व्यक्ति यह पता लगा सकता है कि वह कितनी बार चुकौती करता है और यदि वह कोई लोन चुकाने की तारीख चूक गया है।
  • पूछताछ की जानकारी (इंक्वायरी इंफॉर्मेशन)- लोन लेने वालो द्वारा द्वारा किए गए क्रेडिट आवेदनों के बारे में की गई पूछताछ इस सेक्शन में शामिल है। लोन का आकार, आवेदन की तिथि, आवेदन किए गए लोन का प्रकार और लोन लेंडर का नाम इसका एक हिस्सा है।

अच्छे सिबिल स्कोर के साथ आप बहुत तरह के लोन का लाभ उठा सकते हैं

सिक्योरिटी के हिसाब से लोन इस प्रकार के होते है:

  • सिक्योर्ड लोन - इस तरह के लोन में एक बॉरोवर प्रॉपर्टी, इक्विटी जैसे संपति गिरवी रखता है। तुलनात्मक रूप से, ऐसे लोन में अनसिक्योर्ड लोन की तुलना में कम ब्याज दर होती है।
  • अनसिक्योर्ड लोन - इस तरह के लोन में बॉरोवर कुछ गिरवी नहीं रखता और और लोन तेजी से प्रोसेस होता है क्योंकि कोलेटरल का कोई वैल्यूएशन नही होता। यदि बॉरोवर चूक करता है तो लोन की वसूली के लिए कोई रास्ता नहीं होने से ब्याज दर अधिक होती है।

एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए लोन इस प्रकार हैं:

  • एजुकेशन लोन - शिक्षा ऋण जैसे फाइनेंस साधन एक बॉरोवर को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है। एक अच्छा एकेडमिक रिकॉर्ड एक बॉरोवर को घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कोर्स के लिए फाइनेंस प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
  • पर्सनल लोन - यह किसी व्यक्ति के क्रेडिट हिस्ट्री और आय के आधार पर दिया जाता है। एक बॉरोवर एक पुराने कर्ज को चुकाने, कार के डाउन पेमेंट, मेडिकल इमरजेंसी आदि को चुकाने के लिए पर्सनल लोन का विकल्प चुन सकता है।
  • कार लोन- ये लोन लेंडर द्वारा दोपहिया, वाणिज्यिक वाहनों, पुरानी कारों और नई कारों के लिए ऑफर किए जाते हैं। वाहन लोन के लिए ब्याज दरें निर्धारित हैं।
  • होम लोन – घर खरीदने के लिए यह किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से लिया गया कर्ज होता है। ब्याज दर समायोज्य या निश्चित है और पेमेंट की टर्म्स पर निर्भर है।

गिरवी रखी गई संपत्तियों पर आधारित लोन इस प्रकार हैं:

  • गोल्ड लोन - यह सोने के गहनों के बदले एक लेंडर द्वारा स्वीकृत लोन है, जो आमतौर पर सोने के मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत होता है। निजी, राष्ट्रीयकृत बैंक एनबीएफसी सस्ती ब्याज दरों पर गोल्ड लोन देते हैं।
  • संपत्ति पर लोन - एक कम जोखिम वाला लोन जो एक संपत्ति द्वारा सिक्योर्ड होता है, जहां व्यक्ति और व्यवसाय संपत्ति, म्यूचुअल फंड, बांड आदि गिरवी रखते हैं। लेंडर लोन -से-मूल्य अनुपात का उपयोग करते हैं और ब्याज की दर कम होती है।

सिबिल स्कोर को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक

CIBIL स्कोर कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे:

  • पेमेंट हिस्ट्री

पहले वाले की तुलना में हाल के विलंबित भुगतानों से एक नकारात्मक प्रभाव जुड़ा हुआ है। चुकौती ट्रैक रिकॉर्ड का वेटेज 30% है। 30 दिनों के भुगतान में देरी के दौरान 100 CIBIL पॉइंट की कमी होती है।

  • क्रेडिट जोखिम

फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के जीवन के दौरान जोखिम की राशि क्रेडिट एक्सपोजर है। यदि इसका उपयोग कम है तो सिबिल स्कोर अधिक होगा। इसके अनुरूप वेटेज 25% है।

  • अवधि और उधार वर्गीकरण

एक अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन के प्रोसेस को आसान बनाता है और और उसपर कम ब्याज भी लगता है।। अधिक लोन की अवधि के साथ सिक्योर्ड लोन मिलने से cibil स्कोर अच्छा होता है। इसके अनुरूप वेटेज 25% है।

  • उधार लेने की अवधि

इसकी कैलकुलेशन उधारकर्ता के पहले लोन की मंजूरी की तारीख से की जाती है। यदि समय सीमा अधिक है, तो क्रेडिट स्कोर बेहतर हो जाता है। इसके लिए संबंधित वेटेज 20% है।

  • अन्य कारक

अगर मासिक लोन रिपेमेंट बॉरोवर के इनकम के 50% जितना होता है, तो क्रेडिट स्कोर ठीक माना जाता है।

आप अपना सिबिल स्कोर कैसे सुधार सकते हैं?

  • हमेशा अपने ऋणों के भुगतान को प्राथमिकता दें। यह आपको क्रेडिट पेमेंट का एक साफ हिस्ट्री देता है। 
  • 40% क्रेंडिट यूटिलाइजेशन रेशियो हमेशा बनाए रखने की जरूरत है और बड़े लोन लेने के समय ज्यादा क्रेडिट लिमिट की मांग करें।
  • बहुत से लोन अपने पोर्टफोलियो में रखा करे। यह एजुकेशन, होम और SME बिजनेस लोन भी हो सकता है। लगातार क्रेडिट स्कोर को मॉनिटर करते रहने से आपको आपकी साख का सही पता चलता है।

कम CIBIL स्कोर होने के कारण

लोन देने वाले बैंक और वित्तीय संस्थाएं 750 के नीचे के स्कोर को कम Cibil स्कोर मानते है।

  • कूल बकाया का छोटे हिस्से को कभी भी पेमेंट नही करना चाहिए। इसे कर्ज का एक घेरा समझा जाता है। इसे सही तरीके से नहीं देखा जाता है।
  • इस बात का ध्यान रखना चाहिए की क्रेडिट कार्ड एप्लिकेशन या लोन अप्रूव हुआ की नही। बाद में फिर से अप्लाई करके CIBIL स्कोर को अच्छा करना जरूरी हो जाता है।
  • CIBIL रिपोर्ट में कोई भी गलती होने से CIBIL स्कोर खुद ही गिर जायेगा। स्कोर को नियमित रूप से मॉनिटर करना चाहिए और किसी गलती को जल्दी ही रिपोर्ट करना चाहिए।
  • हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन कभी भी नहीं रखना चाहिए और अगर ये 60 % से अधीक है तब इसके वजह से CIBIL स्कोर गिर सकता है।व्यक्ति हमेशा ज्यादा क्रेडिट लिमिट को महत्व देता है सैंक्शन अमाउंट के मुकाबले में।व्यक्ति अतरिक्त लोन का फायदा लेता है, वो भी बिना कोई प्रोसेसिंग चार्ज दिए और यह उसके क्रेडिट स्कोर को भी बढ़ाता है।
  • अगर लोन अमाउंट कम है और लेट पेमेंट पर कोई कोई पेनाल्टी नही है तो व्यक्ति की मानसिकता में पेमेंट में देरी की बात चली जाती है। लेकिन cibil स्कोर में गिरावट हमेशा होती है भले ही देर से की गई पेमेंट की राशि कुछ भी हो।
  • व्यक्ति को हमेशा पर्सनल लोन के बदले विभिन्न लोन के मिश्रण के साथ जाना चाहिए। जैसे एजुकेशन लोन, होम लोन, कार लोन इसमें शामिल हैं।
  • बहुत बार व्यक्ति जिसके पास पहले से ही कार्ड है उन्हे कई मनी लेंडिंग इंस्टीट्यूट वाले नए कार्ड की ऑफर देते है। हालांकि ऐसा करने से आपकी जो पुराने कार्ड की क्रेडिट हिस्ट्री है उसको नुकसान होगा। अगर नए कार्ड आप लेते हो तब भी आपको पुराने कार्ड को अधिक से अधिक लंबेसमय तक उपयोग करना चाहिए क्योंकि वह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री का प्रमाण है।

CIBIL स्कोर का कैलकुलेशन कैसे होता है? 

CIBIL स्कोर का कैलकुलेशन निम्न आधार पर की जाती है।

  • रिपेमेंट हिस्ट्री: पहले किए गए रिपेमेंट आपके CIBIL क्रेडिट स्कोर  का 35% हिस्सा होते है। ईएमआई भुगतान में चूक और क्रेडिट के पुनर्भुगतान में चूक करने से स्कोर पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
  • चुकौती की समय सीमा: एक प्रकार के क्रेडिट का लाभ उठाने के बाद एक क्रेडिट स्कोर बनता है। यह उल्लेखनीय है कि क्रेडिट के उपयोग से पूरी तरह से बचने से भी मदद नहीं मिलती है। सकारात्मक 10% स्कोर के निर्माण को महत्व दिया जाना चाहिए और इसलिए क्रेडिट का संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। नतीजतन, एक व्यक्ति सिक्योर्ड एंड अनसिक्योर्ड  लोन पर निर्णय ले सकता है। चुकाने की अवधि सिबिल स्कोर में 15% और जोड़ती है।
  • क्रेडिट उपयोग और मौजूदा लोन: 30% का CIBIL क्रेडिट स्कोर मौजूदा चुकाने कीराशियों के कारण होता है जो क्रेडिट रिपोर्ट में परिलक्षित होते हैं। यह स्वीकृत क्रेडिट राशि और कितनी राशि का उपयोग किया गया था, पर आधारित है। एक नकारात्मक क्रेडिट स्कोर तब प्रकट होता है जब आय की तुलना में बहुत अधिक क्रेडिट का उपयोग किया जाता है या हर महीने क्रेडिट कार्ड की सीमा तक पहुंच जाता है।
  • असफल क्रेडिट पूछताछ: हर बार जब कोई व्यक्ति क्रेडिट के लिए आवेदन करता है, तो यह सिबिल रिपोर्ट में रिफ्लेक्ट होता है। कई लोन पूछताछ का CIBIL क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव प्रभाव पड़ सकता है। CIBIL एक व्यक्ति के बारे में क्रेडिट का भूखा और कोई ऐसा व्यक्ति जो अपने साधनों के भीतर जीवित रहने में असमर्थ है, के बारे में बताता है। स्कोर में भी रिजेक्शन नजर आ रहा है। ऐसे मामले में, दिखता है व्यक्ति को आर्थिक रूप से सक्षम नहीं मानता है। इसलिए व्यक्ति को निश्चित होना चाहिए कि वह अप्रूवल प्राप्त करने के एक निश्चित अवसर के साथ स्टैंडर्ड को पूरा करता है।

निष्कर्ष:

सभी व्यक्तियों और व्यवसायों को यह समझने के लिए अपने संबंधित सिबिल स्कोर पर ध्यान देने की जरूरत है कि उनके लोनआवेदन को स्वीकार किया जायेगा या नही। हमें यकीन है कि ऊपर किए गए विवरणों ने आपको एक अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखने के लाभों को समझने में मदद की है। नए अपडेट, समाचार ब्लॉग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम व्यवसायों (MSMEs), बिजनेस टिप्स, आयकर, GST, वेतन और अकाउंट से संबंधित लेखों के लिए  Khatabook को पढ़े।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: यदि लोन लेने वाले अपने सिबिल स्कोर की जांच करते हैं, तो क्या यह उन पर नेगेटिव प्रभाव डालता है?

उत्तर:

लोन लेने वाले को नियमित रूप से अपने सिबिल स्कोर की जांच करनी चाहिए क्योंकि यह उन्हें उनके डिफ़ॉल्ट भुगतानों पर स्पष्टता देता है। अपने CIBIL स्कोर की जाँच करने से उनके क्रेडिट स्कोर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न: एक बॉरोवर 900 का सिबिल स्कोर कैसे प्राप्त कर सकता है?

उत्तर:

जब लोन लेने वाले सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन का लाभ लेने में सक्षम हैं और उनके पास एक उत्कृष्ट क्रेडिट इतिहास है, तो 900 का सिबिल स्कोर उनके ट्रैक रिकॉर्ड पर स्पष्ट रूप से रिफ्लेक्ट करता है।

प्रश्न: क्या CIBIL भारत का एकमात्र क्रेडिट ब्यूरो है?

उत्तर:

नहीं, भारत में सिबिल के अतिरिक्त तीन अन्य क्रेडिट ब्यूरो हैं। इनमें इक्विफैक्स, सीआरआईएफ हाईमार्क और एक्सपेरियन शामिल हैं।

प्रश्न: जब सिबिल स्कोर कुछ भी नहीं है - इसका क्या मतलब है?

उत्तर:

जब आपके पास कोई पहले की क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है, तो आपका सिबिल स्कोर कुछ भी नहीं बताता है।

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