जीएसटी

GST के कुछ नवीनतम समाचार

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था के टेक्स स्ट्रक्चर में नाटकीय रूप से काफी बदलाव आए हैं। GST में सेल्स टैक्स, वैट, ड्युटी और स्थानिक टैक्स यानी के कर को शामिल किया गया है। जिसकी वजह से सब कुछ बदल चूका है, टैक्स की गणना से लेकर फाइल दायर करना व टैक्स एकत्रित करने में भी बदलाव आया है। 

चूंकि जीएसटी भारत में अभी भी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है और इसमें अभी भी संशोधन किए जा रहे हैं, इसलिए एक व्यवसाय के मालिक को कानून के दायरे में रहने के लिए जीएसटी की नवीनतम जानकारी से अवगत रहना जरूरी है। जीएसटी के अमल के दौरान टैक्स स्लैब और इसके अंतर्गत कौन से व्यवसाय आते है जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर कई बदलाव किए गये है। अभी भी कई क्षेत्र ऐसे  है जिसमें भविष्य में बदलाव आ सकते है इसलिए जीएसटी से जूड़ी हर नवीनत जानकारी से अवगत होना जरूरी है।

वैश्विक और स्थानिक विपरित परिस्थितियों की वजह से देश की जीडीपी पीछले कुछ महिनों से घट रही है। पिछली तिमाही में जीडीपी 5% तक गिर गया है और सरकार ने फिर से जीएसटी को बढ़ाने का फैसला किया है। सितम्बर 2019 में आयोजित 37 वीं जीएसटी काउंसिल (परिषद) की बैठक में, देश के विकास को ध्यान में रखकर कई बदलावों की घोषणा की गई थी।

प्रमुख कटौती :

होटल उद्योग में काफी आर्थिक समस्या देखने को मिल रही है, चूंकि भारत में होटल उद्योग रोजगार
का बड़ा स्त्रोत है, इस लिए सरकार ने इस उद्योग में टैक्स कटौती की घोषणा की है।
ज्वेलरी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अब से जिरो जीएसटी।
कट और पॉलिश किए गए अर्ध कींमती स्टोन के टैक्स रैट 3% से 0.25% कर दिया है।
हिरे से संबंधित कार्य और सेवा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी 5% से 1.5% कर दिया गया है।
इंजीनियरिंग क्षेत्र में मशीन कार्य और सेवाओ के जीएसटी रैट 12% कर दिए गए हैं, जो की पहले 18% थे।

विविध बढ़ोतरी :

कैफीनयुक्त पेय जैसी कई चीजों के जीएसटी दर बढ़ा दिए गए हैं। जो पहले 12% था जिसमें मुआवजा कर 12% मिलाकर अब 28% कर दिया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहन :

सरकार जलवायु परिवर्तन को कम करने के साथ ग्रीन व्हीकल यानी के इलेक्ट्रिक वाहनों को पेश करके पर्यावरण अनुकूल आर्थिक मोडल बनाने की कोशिश कर रही है।

इसके कारण, इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जो इसे आंतरिक दहन इंजनों के संबंध में प्रतिस्पर्धी बनाता है। इन वाहनों उद्योग को बढ़ावा देने के लिए काउंसिल ने इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग से संबंधित टैक्स दरों में 18% से 5% तक की कटौती की है।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स की घोषणा से हीं 28% जीएसटी स्लैब विवाद का एक हिस्सा रहा है। कई लोगो को लगता था की भारत जैसे देश के लिए 28% कर दर बहूत अधिक है और यह ज्यादा नहीं टिक पाएगा। सरकार ने इस बात को काफी गंभीरता से लिया और 6 वस्तुओं को 28% कर से मुक्त किया है। हालांकि अभी भी कुछ चीजें जैसे की सीमेन्ट, लक्जरी ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल और नौका इस लिस्ट में शामिल है।

100 रूपये से ज्यादा की मुवी टिकट को भी अब 28% स्लैब से हटाकर 18% कर दिया गया है। विडीयो गेम और लिथियम-आयन पावर बैंक जैसी चीजों को भी अब 28% की जगह 18% के स्लैब में शामिल किया गया है। यहां तक की मॉनिटर और टेलिविज़न स्क्रीन के टैक्स भी 28% से कम कर के 18% कर दिया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव :

  • सशर्त जीएसटी छूट की वैधता को 30 सितंबर 2020 तक हवाई या समुद्र के द्वारा निर्यात करने के लिए बढ़ा दिया गया है।
  • नई जीएसटी रिटर्न प्रणाली जिसे अभी लागू किया जाना था लेकिन अब उसे अप्रैल 2020 तक के लिए टाल दिया गया है। यह एक बहुत अच्छा निर्णय है और इसकी सराहना व्यापार मालिकों के द्वारा भी की गई है क्योंकि टैक्स फाइलिंग की नई प्रणाली में बदलाव करना मुश्किल है और समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। तो इस देरी के साथ ही व्यवसाय अगले साल नए सिरे से शुरू हो सकता है।
  • GSTR-9 को छोटे व्यवसायों के लिए वैकल्पिक बनाया गया है। जो करदाता का टर्नओवर वित्त वर्ष 2017-18 और वित्त वर्ष 2018-2019 के दौरान 2 करोड़ से कम है, वे सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम्स (CBIC) के द्वारा अधिसूचित तिथि के बाद चाहे तो GSTR-9 फाइल करना या न करने का निर्णय अपनी पसंदगी से कर सकते है।
  • जीएसटीआर -3 बी पर आईटीसी के दावे पर प्रतिबंध। यदि आपूर्तिकर्ताओं बाह्य आपूर्ति का विवरण प्रदान नहीं करते तो इनपुट टैक्स क्रेडिट  प्राप्तकर्ताओं के लिए इसे प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
  • वित वर्ष 2017-18  और 2018-19 के करदाताओं के लिए काउंसिल ने GSTR-9A को हटा दिया गया है। यह उम्मीद की जा रही है की GSTR-9A को बंद कर दिया जाएगा और उसके कार्यों को GSTR-4 में शामिल किया जाएगा, जिसमें टर्नओवर और कर विवरणों की वार्षिक घोषणा की जाती हैं।
  •  उचित भंडारण और तापमान नियंत्रित सुविधाओं की कमी के कारण भारत में खाद्य और कच्चे मिल का स्टोरेज करना मुश्किल बन चूका है। इसलिए ऐसी किसी भी स्टोरेज सुविधाओं पर उच्च टैक्स बड़ी समस्या बन चूका है। यहीं कारण है की परिषद ने अनाज, दाल, फल, सब्जी और मसाले, गन्ना, गुड, कच्ची सब्जी जैसे कपास, सन, जूट आदि के लिए स्टोरेज और वेयरहाउस की सेवाओं को इससे मुक्ति दी गई है। 
  • जम्मू और कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में घोषित करने के बाद अब नया अधिनियम भी घोषित किया जाएगा। 

जीएसटी के तहत करदाताओं को आधार कार्ड के पंजीकरण की अनिवार्यता और राउंड के लिए दावा करने के लिए भी इसे अनिवार्य बनाने की बातचीत चल रही है।

निष्कर्ष :

अर्थव्यवस्था की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के अनुसार जीएसटी को बदल दिया गया है। इसमें और भी बदलाव किए जाएंगे और अत्याधिक मजबूत प्रणाली के लिए अभी भी कई परिवर्तन की आवश्यकता है।